(नोट:- समेकित नियमावली में संशोधनों का समावेश करने में पूर्ण सावधानी बरती गयी है तथापि सन्दर्भ हेतु सरकारी गजट का ही प्रयोग किया जाये)

उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक परिवीक्षा नियमावली 2013 (प्रथम संशोधन-2016 तक यथासंशोधित)

1. संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ और लागू होना

(1) यह नियमावली उत्तर प्रदेश सरकार सेवक परिवीक्षा नियमावली, 2013 कही जायेगी। 

(2) यह तुरन्त प्रवृत्त होगी।

(3) यह उन सभी व्यक्तियों पर लागू होगी जो उत्तर प्रदेश के कार्य-कलापों के सम्बन्ध में कोई सिविल पद धारण करते हैं और जो संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक के अधीन राज्यपाल के नियम बनाने के नियंत्रणाधीन हों।

2. अध्यारोही प्रभाव

इस नियमावली के उपबन्ध संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक के अधीन राज्यपाल द्वारा बनाए गए किन्हीं अन्य नियमों या तत्समय प्रवृत्त आदेशों में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे। 

3. परिभाषाएं

जब तक कि विषय या सन्दर्भ में कोई बात प्रतिकूल न हो, इस नियमावली में,

(क) किसी पद या सेवा के सम्बन्ध में ”नियुक्ति प्राधिकारी” का तात्पर्य सुसंगत सेवा नियमावली या सरकार द्वारा जारी किए गए कार्यपालक अनुदेशों के अधीन ऐसे पद पर या सेवा में नियुक्ति करने के लिए सशक्त प्राधिकारी से है ;

(ख) ”संविधान” का तात्पर्य ”भारत का संविधान” से है ;

(ग) ”संवर्ग” का तात्पर्य किसी सेवा की या पृथक इकाई के रूप में स्वीकृत, सेवा के किसी भाग की सदस्य संख्या से है ;

(घ) ”सरकार” का तात्पर्य उत्तर प्रदेश की सरकार से है ;

(ङ) ”राज्यपाल” का तात्पर्य उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से है ;

(च) ”सरकारी सेवक” का तात्पर्य उत्तर प्रदेश राज्य के कार्य-कलापों के सम्बन्ध में किसी लोक सेवा या पद पर नियुक्त किसी व्यक्ति से है ;

(छ) ”सेवा” का तात्पर्य सुसंगत सेवा नियमावली या सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए कार्यपालक अनुदेश में यथा परिभाषित सेवा से है ;

(ज) ”मौलिक नियुक्ति” का तात्पर्य सेवा के संवर्ग में किसी पद पर ऐसी नियुक्ति से है जो तदर्थ नियुक्ति न हो और नियमों के अनुसार चयन के पश्चात् की गई हो, और यदि कोई नियम न हो तो सरकार द्वारा जारी किए गए कार्यपालक अनुदेशों द्वारा तत्समय विहित प्रक्रिया के अनुसार चयन के पश्चात् की गई हो।

4. परिवीक्षा, जहां आवश्यक हो

(1) सीधी भर्ती के माध्यम से, किसी पद पर मौलिक रूप से नियुक्त किसी व्यक्ति को दो वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखा जायेगा। नियुक्ति प्राधिकारी, व्यक्तिगत मामलों में, अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से वह दिनांक, जब तक के लिए अवधि बढ़ाई जाय, विनिर्दिष्ट करते हुए परिवीक्षा अवधि को बढ़ा सकता है ;

परन्तु यह कि, आपवादिक परिस्थितियों को छोड़कर परिवीक्षा अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाई जायेगी और किसी भी परिस्थिति में दो वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाई जायेगी।

(2) भर्ती के स्रोतों में से एक यदि सीधी भर्ती है, तो पदोन्नति द्वारा किसी पद पर मौलिक रूप से नियुक्त किसी व्यक्ति को दो वर्ष की अवधि के लिये परिवीक्षा पर रखा जायेगा। नियुक्ति प्राधिकारी, व्यक्तिगत मामलों में, अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से वह दिनांक, जब तक के लिये अवधि बढ़ाई जाय, विनिर्दिष्ट करते हुए परिवीक्षा अवधि को बढ़ा सकता है ;

परन्तु यह कि, आपवादिक परिस्थितियों को छोड़कर परिवीक्षा अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाई जायेगी और किसी भी परिस्थिति में दो वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाई जायेगी।

(3) सुसंगत सेवा नियमावली में विहित प्रक्रिया के अनुसरण में किसी पद पर समायोजन, आमेलन या संविलयन द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को एक वर्ष की अवधि के लिये परिवीक्षा पर रखा जायेगा। नियुक्ति प्राधिकारी, व्यक्तिगत मामलों में, अभिलिखित किये जाने वाले कारण से वह दिनांक, जब तक के लिये अवधि बढ़ाई जाय, विनिर्दिष्ट करते हुए परिवीक्षा अवधि को बढ़ा सकता है ;

परन्तु यह कि, आपवादिक परिस्थितियों को छोड़कर परिवीक्षा अवधि छः माह से अधिक नहीं बढ़ाई जायेगी और किसी भी परिस्थिति में एक वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाई जायेगी।

5. परिवीक्षा, जहां आवश्यक न हो

किसी व्यक्ति को परिवीक्षा पर रखना आवश्यक न होगा यदि उसे किसी ऐसे पद पर पदोन्नत किया गया है, जहां भर्ती का स्रोत केवल पदोन्नति है।

6. पद, जिन पर यह नियमावली लागू न होगी

यह नियमावली वहां नहीं लागू होगी जहां नियुक्तियां ऐसे अधिष्ठानों के अधीन पदों पर की गई हों, जिनका सृजन एक निश्चित एवं पूर्णतः अस्थायी अवधि के लिये किया गया है, यथा-समितियां, जांच आयोग, आपात विशेष से निपटने के लिये सृजित किए गए संगठन, जिनके कुछ वर्षों से अधिक बने रहने की आशा नहीं है, विनिर्दिष्ट अवधि हेतु परियोजनाओं के लिये सृजित पद और पूर्णतः अस्थायी संगठन।

Footnotes
  1. उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक परिवीक्षा नियमावली 2013 ↩
  2. उत्तर प्रदेश सरकार सेवक परिवीक्षा (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2016 — नियम 2, स्तम्भ-2। उक्त संशोधन द्वारा मूल नियमावली, 2013 के सम्पूर्ण नियम 4 को प्रतिस्थापित किया गया है। फलस्वरूप, मूल नियमावली का नियम 4(4), जिसमें भिन्न सेवा या समूह में केवल पदोन्नति के स्रोत से नियुक्ति पर एक वर्ष की परिवीक्षा का प्रावधान था, संशोधित नियमावली में सम्मिलित नहीं है, क्योंकि प्रतिस्थापित नियम 4 में केवल उपनियम (1), (2) एवं (3) ही दिए गए हैं। ↩
  3. उत्तर प्रदेश सरकार सेवक परिवीक्षा (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2016 — नियम 3, स्तम्भ-2। ↩