सरकारी सेवकों की सेवाकाल में मृत्यु हो जाने पर उनके आश्रितों को आर्थिक संकट से उबारने हेतु उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली, 1974 प्रख्यापित की गई है। उक्त नियमावली में मृतक आश्रित की नियुक्ति उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परिधि के बाहर एवं समूह–ग एवं समूह–घ के पदों पर किये जाने की व्यवस्था है।
उक्त मूल नियमावली में अब तक निम्नवत चौदह संशोधन किये गये हैं—
| क्र०सं० | नियमावली का नाम व वर्ष | शासनादेश संख्या व दिनांक | संशोधन का संक्षिप्त विवरण |
|---|---|---|---|
| 1 | मूल नियमावली, 1974 | 6/12/1973/नियुक्ति-4, 07.10.1974 | — |
| 2 | प्रथम संशोधन नियमावली, 1981 | 4/7/1979–कार्मिक–2, 20.02.1981 | नियम 5-क बढ़ाया (तात्कालिक संदर्भ) |
| 3 | द्वितीय संशोधन नियमावली, 1991 | 6/12/1973–कार्मिक–2, 12.08.1991 | नियम 3 व 8(3) में संशोधन |
| 4 | तृतीय संशोधन नियमावली, 1993 | 6/12/73/कार्मिक–2/93, 16.04.1993 | नियम 5 में संशोधन |
| 5 | चतुर्थ संशोधन नियमावली, 1994 | 6/12/1973–कार्मिक–2, 21.04.1994 | नियम 5 में पुनः संशोधन |
| 6 | पाँचवाँ संशोधन नियमावली, 1999 | 6/12/1973–का०–2, 20.01.1999 | नियम 5 में पुनः संशोधन |
| 7 | छठा संशोधन नियमावली, 2001 | 6/12/73–का०–2–2001, 12.10.2001 | नियम 2 व 5 में संशोधन |
| 8 | सातवाँ संशोधन नियमावली, 2006 | 6/12/73–का०–2–2006, 28.07.2006 | नियम 5 में पुनः संशोधन |
| 9 | आठवाँ संशोधन नियमावली, 2007 | 6/12/73–का०–2–2007, 09.02.2007 | नियम 2(ग) में संशोधन |
| 10 | नवाँ संशोधन नियमावली, 2011 | 6/12/73–का०–2–2011, 22.12.2011 | नियम 2(ग) में पुनः संशोधन |
| 11 | दसवाँ संशोधन नियमावली, 2014 | 6/12/73–का०–2–टी०सी०–4, 17.01.2014 | नियम 5 में पुनः संशोधन |
| 12 | ग्यारहवाँ संशोधन नियमावली, 2014 | 6/12/73–का०–2–टी०सी०–4, 22.01.2014 | नियम 5 में पुनः संशोधन |
| 13 | बारहवाँ संशोधन नियमावली, 2021 | 6/12/73–का०–2/टी०सी०–IV, 13.11.2021 | नियम 2(ग) में पुनः संशोधन |
| 14 | तेरहवाँ संशोधन नियमावली,2022 | 6/12/73-का-2-2022/टी0सी0-VI(II), 27.12.2022 | नियम 5(1)(एक) में संशोधन |
| 15 | चौदहवाँ संशोधन नियमावली, 2025 | 01/2025/6/12/73 /141/47/-का-2-2024/T.C.IV(III), 29.09.2025 | नियम 5(1)(एक) में पुनः संशोधन |
उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली, 1974 (यथासंशोधित) तथा इस सम्बन्ध में निर्गत शासनादेशों द्वारा की गयी व्यवस्थाओं का संक्षिप्त विवरण निम्नवत है :–
1. संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ:–(1) यह नियमावली उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली, 1974 कहलायेगी।
(2) यह 21 दिसम्बर, 1973 से प्रवृत्त हुई समझी जायेगी।
2. परिभाषाएँ:–जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो इस नियमावली में–
(क) सरकारी सेवक का तात्पर्य उ०प्र० के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवायोजित ऐसे सरकारी सेवक से है जो–
- ऐसे सेवायोजन में स्थायी था; या
- यद्यपि अस्थायी है तथापि ऐसे सेवायोजन में नियमित रूप से नियुक्त किया गया था; या
- यद्यपि नियमित रूप से नियुक्त नहीं है तथापि ऐसे सेवायोजन में नियमित रिक्ति में 3 वर्ष की निरन्तर सेवा की है।
स्पष्टीकरण :– “नियमित रूप से नियुक्ति” का तात्पर्य यथास्थिति, पद पर या सेवा में भर्ती के लिए अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार नियुक्त किये जाने से है,
(ख) ‘मृत सरकारी सेवक’ का तात्पर्य ऐसे सरकारी सेवक से है जिसकी मृत्यु सेवा में रहते हुए हो जाए,
(ग) ‘कुटुम्ब’ के अन्तर्गत मृत सरकारी सेवक के निम्नलिखित सम्बन्धी होंगे–
(एक) पत्नी या पति,
(दो) पुत्र,
(तीन) अविवाहित पुत्रियाँ तथा विधवा पुत्रियाँ,
(चार) मृत सरकारी सेवक पर निर्भर अविवाहित भाई, अविवाहित बहन और विधवा माता, यदि मृत सरकारी सेवक अविवाहित था।
(पाँच) ऐसे लापता सरकारी सेवक, जिसे सक्षम न्यायालय के द्वारा ‘मृत’ के रूप में घोषित किया गया है, के उपर्युल्लिखित सम्बन्धी
परन्तु यदि मृत सरकारी सेवक के उपर्युल्लिखित सम्बन्धियों में से किसी से सम्बन्धित कोई व्यक्ति उपलब्ध नहीं है या वह शारीरिक और मानसिक रूप से अनुपयुक्त पाया जाये और इस प्रकार सरकारी सेवा में नियोजन के लिये अपात्र हो तो केवल ऐसी स्थिति में शब्द ‘कुटुम्ब’ के अन्तर्गत मृत सरकारी सेवक पर आश्रित पौत्र और अविवाहित पौत्रियाँ भी सम्मिलित होंगी।
(घ) ‘कार्यालय का प्रधान’ का तात्पर्य उस कार्यालय के प्रधान से है जिस कार्यालय में मृत सरकारी सेवक अपनी मृत्यु के पूर्व सेवारत था।
3. नियमावली का लागू किया जाना:-यह नियमावली उन सेवाओं और पदों को छोड़कर जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के क्षेत्रान्तर्गत आते हैं या जो पूर्व में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के क्षेत्रान्तर्गत थे और कालान्तर में उन्हें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के क्षेत्रान्तर्गत रख दिया गया है, उत्तर प्रदेश राज्य के कार्यकलाप से संबंधित लोक सेवाओं में और पदों पर मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती पर लागू होंगे।
4. नियमावली का अध्यारोही प्रभाव:-इस नियमावली के प्रारम्भ होने के समय प्रवृत्त किन्हीं नियमों, विनियमों या आदेशों के अन्तर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते भी यह नियमावली तथा तद्धीन जारी किया गया कोई आदेश प्रभावी होगा।
5. मृतक के कुटुम्ब के किसी सदस्य की भर्ती:- (1)- यदि इस नियमावली के प्रारम्भ होने के पश्चात् किसी सरकारी सेवक की सेवाकाल में मृत्यु हो जाये और मृत सरकारी सेवक का पति या पत्नी (जैसी भी स्थिति हो) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या उसके द्वारा नियंत्रित किसी निगम के अधीन पहले से सेवायोजित न हो तो उसके कुटुम्ब के ऐसे एक सदस्य को जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या उसके द्वारा नियंत्रित किसी निगम के अधीन पहले से सेवायोजित न हो, इस प्रयोजन के लिए आवेदन करने पर भर्ती के सामान्य नियमों को शिथिल करते हुये, सरकारी सेवा में किसी पद पर ऐसे पद को छोड़कर जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के क्षेत्रान्तर्गत हों, उपयुक्त सेवायोजन प्रदान किया जायेगा यदि ऐसा व्यक्तिः-
(एक) पद के लिए विहित शैक्षिक अर्हताएं पूरी करता हो:
परन्तु यह और भी कि, यदि नियुक्ति किसी ऐसे पद पर की जाती है जिसके लिए टंकण को एक अनिवार्य अर्हता के रूप में विहित किया गया है, और मृत सरकारी सेवक के आश्रित के पास टंकण में अपेक्षित प्रवीणता नहीं है, तो उसे इस शर्त के अधीन नियुक्त किया जायेगा कि वह एक वर्ष के भीतर ही टंकण में 25 शब्द प्रति मिनट की अपेक्षित गति प्राप्त कर लेगा और यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है तो उसकी सामान्य वार्षिक वेतन-वृद्धि रोक ली जायेगी, और टंकण में अपेक्षित गति प्राप्त करने के लिए उसे अग्रेतर एक वर्ष की अवधि प्रदान की जायेगी, और यदि बढ़ायी गयी अवधि में भी वह टंकण में अपेक्षित गति प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसे चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति प्रदान करने का आदेश जारी किया जाएगा। इस प्रकार प्रदान की गई नियुक्ति प्रतिवर्तन न होकर नई नियुक्ति समझी जाएगी। यदि वह नियत समय के भीतर चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसकी सेवायें समाप्त कर दी जायेंगी,
परन्तु यह और भी कि, किसी ऐसे पद पर नियुक्ति किए जाने की दशा में, जिसके लिए कम्प्यूटर प्रचालन और टंकण एक अनिवार्य अर्हता के रूप में विहित की गयी है और मृत सरकारी सेवक का आश्रित कम्प्यूटर प्रचालन और टंकण में अपेक्षित प्रवीणता नहीं रखता है, तो उसे इस शर्त के अधीन रहते हुए नियुक्त कर लिया जायेगा कि वह एक वर्ष के भीतर ही कम्प्यूटर प्रचालन में डी0ओ0ई0ए0 सी0सी0 सोसायटी द्वारा प्रदत्त सी0सी0सी0 प्रमाण-पत्र या सरकार द्वारा उसके समकक्ष मान्यता प्राप्त किसी प्रमाण-पत्र के साथ-साथ टंकण में 25 शब्द प्रति मिनट की अपेक्षित गति अर्जित कर लेगा, और यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है तो उसकी सामान्य वार्षिक वेतन-वृद्धि रोक ली जायेगी, और कम्प्यूटर प्रचालन में अपेक्षित प्रमाण-पत्र और टंकण में अपेक्षित गति अर्जित करने के लिए उसे एक वर्ष की अग्रेतर अवधि प्रदान की जायेगी, और यदि बढ़ायी गई अवधि में भी वह कम्प्यूटर प्रचालन में अपेक्षित प्रमाण-पत्र और टंकण में अपेक्षित गति अर्जित करने में विफल रहता है तो उसे चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति प्रदान करने का आदेश जारी किया जाएगा। इस प्रकार प्रदान की गई नियुक्ति प्रतिवर्तन न होकर नई नियुक्ति समझी जाएगी। यदि वह नियत समय के भीतर चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसकी सेवायें समाप्त कर दी जायेंगी,
“परन्तु यह और भी कि मृत सरकारी सेवक जिस समूह में मृत्यु के समय कार्यरत था, मृत सरकारी सेवक के आश्रित को उस समूह से उच्चतर समूह में नियुक्त नहीं किया जाएगा।
परन्तु यह और कि मृत सरकारी सेवक के आश्रित को केवल समूह “ग” के पद (ऐसी सेवाओं और पदों को छोड़कर, जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के परिधि के भीतर आते हैं या जो पूर्व में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के परिधि के भीतर थे और बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परिधि के भीतर रख दिया गया है) और समूह “घ” के पदों पर नियुक्त किया जाएगा।
(दो) सरकारी सेवा के लिये अन्यथा अर्ह हो, और
(तीन) सरकारी सेवक की मृत्यु के दिनांक के पाँच वर्ष के भीतर सेवायोजन के लिए आवेदन करता है:
परन्तु जहाँ राज्य सरकार का यह समाधान हो जाय कि सेवायोजन के लिए आवेदन करने के लिए नियत समय सीमा से किसी विशिष्ट मामले में असम्यक कठिनाई होगी तो वह अपेक्षाओं को जिन्हें वह मामले में न्याय-संगत और साम्यपूर्ण रीति से कार्यवाही करने के लिये आवश्यक समझे, अभिमुक्त या शिथिल कर सकती है:
परन्तु यह और कि उपर्युक्त परन्तुक के प्रयोजन के लिये सम्बन्धित व्यक्ति कारणों को स्पष्ट करेगा और आवेदन करने के लिये नियत समय सीमा के अवसान के पश्चात सेवायोजन के लिये आवेदन करने में विलम्ब के कारण के सम्बन्ध में ऐसे विलम्ब के समर्थन में आवश्यक अभिलेखों/सबूत सहित लिखित में समुचित औचित्य देगा और सरकार विलम्ब के कारण के लिए सभी तथ्यों पर विचार करते हुए समुचित निर्णय लेगी।
(2) जहाँ तक सम्भव हो, ऐसा सेवायोजन उसी विभाग में दिया जाना चाहिये, जिसमें मृत सरकारी सेवक अपनी मृत्यु से पूर्व सेवायोजित था।
(3) उपनियम (1) के अधीन की गई प्रत्येक नियुक्ति, इस शर्त के अधीन होगी कि उपनियम (1) के अधीन नियुक्त व्यक्ति, मृतक सरकारी सेवक के परिवार के अन्य सदस्यों का अनुरक्षण करेगा जो कि स्वयं का अनुरक्षण करने में असमर्थ हैं और उक्त मृत सरकारी सेवक पर उसकी मृत्यु के ठीक पूर्व आश्रित थे।
(4) जहाँ उपनियम (1) के अधीन नियुक्त व्यक्ति, किसी ऐसे व्यक्ति का अनुरक्षण करने में उपेक्षा या इन्कार करता है जिसके प्रति अनुरक्षण के लिये वह उपनियम (3) के अधीन उत्तरदायी है तो उसकी सेवायें, समय-समय पर यथासंशोधित उ0प्र0 सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के अनुसरण में समाप्त की जा सकती हैं।
6. सेवायोजन के लिये आवेदन पत्र की विषय वस्तु :-इस नियमावली के लिये नियुक्ति के लिये आवेदन पत्र जिस पद पर नियुक्ति अभिलक्षित है, उस पद से सम्बन्धित नियुक्ति प्राधिकारी को सम्बोधित किया जायेगा, किन्तु यह उस कार्यालय के प्रधान को भेजा जायेगा, जहाँ मृत सरकारी सेवक अपनी मृत्यु के पूर्व कार्य कर रहा था। आवेदन-पत्र में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित सूचना दी जायेगी—
(क) मृत सरकारी सेवक की मृत्यु का दिनांक, वह विभाग जहाँ और वह पद जिस पर वह अपनी मृत्यु के पूर्व कर रहा था,
(ख) मृतक के कुटुम्ब के सदस्यों के नाम, उनकी आयु तथा अन्य ब्यौरे विशेषतया उनके विवाह, सेवायोजन तथा आय सम्बन्धी ब्यौरे,
(ग) कुटुम्ब की वित्तीय दशा का ब्यौरा, और,
(घ) आवेदक की शैक्षिक तथा अन्य अर्हताएँ, यदि कोई हों।
7. प्रक्रिया जब कुटुम्ब के एकाधिक सदस्य सेवायोजन चाहते हों:-यदि मृत सरकारी सेवक कुटुम्ब के एकाधिक सदस्य इस नियमावली के अधीन सेवायोजन चाहते हों तो कार्यालय का प्रधान सेवायोजित करने के लिये व्यक्ति की उपयुक्तता का विनिश्चय करेगा। समस्त कुटुम्ब, विशेषतः उसके विधवा तथा अवयस्क सदस्यों के कल्याण के निमित्त उसके सम्पूर्ण हित को भी ध्यान में रखते हुये निर्णय लिया जायेगा।
8. आयु तथा अन्य अपेक्षाओं में शिथिलता:-(1) इस नियमावली के अधीन नियुक्ति चाहने वाले अभ्यर्थी की आयु नियुक्ति के समय अठारह वर्ष से कम नहीं होनी चाहिये।
(2) चयन के लिये प्रक्रिया संबंधी अपेक्षाओं से, यथा लिखित परीक्षा या चयन समिति द्वारा साक्षात्कार से मुक्त कर दिया जायेगा किन्तु अभ्यर्थी पद विषयक प्रत्याशित कार्य तथा दक्षता के न्यूनतम स्तर को बनाये रखेगा इस बात का समाधान करने के उद्देश्य से अभ्यर्थी का साक्षात्कार करने के लिये नियुक्ति प्राधिकारी स्वाधीन होगा।
(3) इस नियमावली के अधीन कोई नियुक्ति विद्यमान रिक्ति में की जायेगी : प्रतिबन्ध यह है कि यदि कोई रिक्ति विद्यमान न हो, तो नियुक्ति तुरन्त किसी ऐसे अधिसंख्य पद के प्रति की जायेगी, जिसे इस प्रयोजन के लिये सृजित किया गया समझा जायेगा और जो तब तक चलेगा जब तक कोई रिक्ति उपलब्ध न हो जाय।
9. सामान्य अर्हताओं के सम्बन्ध में नियुक्ति प्राधिकारी का समाधान:-किसी अभ्यर्थी को नियुक्त करने के पूर्व नियुक्ति प्राधिकारी अपना यह समाधान करेगा कि-
(क) अभ्यर्थी का चरित्र ऐसा है कि वह सरकारी सेवा में सेवायोजन के लिये सभी प्रकार से उपयुक्त है,
टिप्पणी :- संघ सरकार या किसी राज्य सरकार अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या उसके द्वारा नियंत्रित किसी निगम द्वारा पदच्युत व्यक्ति सेवा में नियुक्ति के लिये पात्र नहीं समझे जायेंगे।
(ख) वह मानसिक तथा शारीरिक रूप से स्वस्थ है और किसी ऐसे शारीरिक दोष से मुक्त है जिसके कारण उसके द्वारा अपने कर्तव्यों का दक्षतापूर्वक पालन करने में बाधा पड़ने की सम्भावना हो तथा इस बात के लिये अभ्यर्थी से उस मामले में लागू नियमों के अनुसार समुचित चिकित्सा प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित होने और स्वास्थ्य का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जायेगी।
(ग) पुरुष अभ्यर्थी की दशा में, उसकी एक से अधिक पत्नी जीवित न हों और किसी महिला अभ्यर्थी की दशा में उसने ऐसे व्यक्ति से विवाह न किया हो जिसकी पहले से ही एक पत्नी जीवित हो।
10. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति:- राज्य सरकार, इस नियमावली के किसी उपबंध के कार्यान्वयन में किसी कठिनाई को (जिसके विद्यमान होने के बारे में वह एकमात्र निर्णायक हो) दूर करने के प्रयोजनार्थ कोई ऐसे सामान्य या विशेष आदेश दे सकती है जिसे वह उचित व्यवहार या लोकहित में आवश्यक या समीचीन समझे।
मृतक आश्रित नियुक्ति के संबंध में योजित सिविल मिसलेनियस रिट याचिका संख्या 2228 (एस०एस०)/ 2014 प्रकाश अग्रवाल बनाम रजिस्ट्रार जनरल, उच्च न्यायालय इलाहाबाद में मा० उच्च न्यायालय, लखनऊ खण्डपीठ ने अपने आदेश दिनांक 17.04.2014 के प्रस्तर–49 में निम्नलिखित संवीक्षाएं की हैं–
1– आश्रित के नौकरी हेतु आवेदन करने के तीन माह के अन्दर उसका प्रार्थना–पत्र निस्तारित हो जाना चाहिए। नियमावली के अन्तर्गत कोई समय सीमा प्राविधानित नहीं है किन्तु नियमों का निहितार्थ तात्कालिक आर्थिक संकट में परिवार को तत्काल राहत प्रदान करना है। इस पृष्ठभूमि में सक्षम प्राधिकारी को एक न्यूनतम संभावित समय के अन्दर ऐसे प्रार्थना पत्रों को निस्तारित करना होता है। किसी भी दशा में प्रार्थना पत्र को तीन महीनों से अधिक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
2– नियमावली के अंतर्गत नियुक्ति मात्र इस आधार पर अस्वीकार नहीं की जा सकती कि आवेदक की आर्थिक स्थिति अच्छी है। न ही मृत्यु के समय सेवानिवृत्तिक लाभों का भुगतान अस्वीकृति का कोई आधार बनता है।
3– पदों की अनुपलब्धता नियुक्ति अस्वीकार करने का आधार नहीं है।
4– तृतीय श्रेणी पद पर नियुक्ति मात्र इस आधार पर अस्वीकृत नहीं की जा सकती कि मृतक तृतीय/ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था।
5– नियुक्ति का प्रस्ताव अभ्यर्थी की योग्यता एवं उपयुक्तता के अनुसार दिया जाता है और आवेदक को उसके अनुरूप ही नियुक्ति दी जानी चाहिये। यदि नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा उस पद, जिसके लिए आवेदक द्वारा दावा किया गया है, पर अनुपयुक्तता के कारण नियुक्ति नहीं दी जाती है तो नियुक्ति प्राधिकारी को कारणों का उल्लेख करना होगा।
6– मृतक–आश्रित को खास स्थिति अथवा स्थान का दावा करने का अधिकार नहीं है और यह नियुक्ति प्राधिकारी के विनिश्चयाधीन है कि वह प्रकरण के तथ्यों एवं घटनाक्रम में सही लगने वाला सम्यक् आदेश पारित करे।
शासनादेश संख्या 6/12/73/का०–2/2014–टी०सी०–4 दिनांक 17.06.2014 द्वारा मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की नियुक्ति के परिप्रेक्ष्य में मा० उच्च न्यायालय की उपर्युक्त संवीक्षाओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।