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सन्दर्भ— वित्तीय नियम संग्रह खण्ड–दो भाग 2 से 4 मूल नियम 58 से 104 एवं सहायक नियम 35 से 172 तथा समय-समय पर जारी शासनादेश।

अवकाश नियमों के प्रस्तुतीकरण को सरलता प्रदान करने के लिए अवकाशों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहली श्रेणी में वे अवकाश रखे जा सकते हैं जो मूलतः वित्तीय नियम संग्रह खण्ड–दो (भाग 2 से 4) में वर्णित मूल एवं सहायक नियमों से संचालित होते हैं तथा द्वितीय श्रेणी में वे अवकाश जो भिन्न प्रकार के हैं, यथा आकस्मिक अवकाश।

(I) वित्तीय नियम संग्रह खण्ड–दो (भाग 2 से 4) के नियमों द्वारा संचालित विभिन्न अवकाश

सरकारी कर्मचारियों को वित्तीय नियमों के अन्तर्गत निम्नलिखित प्रकार के अवकाश अनुमन्य होते हैं जिनका उपभोग निर्धारित नियमों एवं प्रतिबन्धों के अधीन किया जा सकता हैः-

  1. अर्जित अवकाश (Earned Leave)
  2. निजी कार्य पर अवकाश (Leave on Private Affairs)
  3. चिकित्सा प्रमाण पत्र पर अवकाश (Leave on Medical Certificate)
  4. मातृत्व अवकाश (Maternity Leave)
  5. असाधारण अवकाश (Extra Ordinary Leave)
  6. चिकित्सालय अवकाश (Hospital Leave)
  7. अध्ययन अवकाश (Study Leave)
  8. विशेष दिव्यांगता अवकाश (Special Disability Leave)
  9. लघुकृत अवकाश (Commuted Leave)
  10. बाल्य देखभाल अवकाश (Child Care Leave)
  11. दत्तक ग्रहण अवकाश (Child Adoption Leave)

अवकाश सम्बन्धी कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

अवकाश का तात्पर्य यहाँ उपर्युक्त सभी अवकाशों से है जब तक कि स्पष्ट रूप से किसी अवकाश विशेष का उल्लेख न किया गया हो।

अवकाश का अर्जन ड्यूटी द्वारा
अवकाश केवल ड्यूटी देकर ही उपार्जित किया जाता है। इस नियम के लिए बाह्य सेवा में व्यतीत की गई अवधि को ड्यूटी माना जाता है, यदि ऐसी अवधि के लिए अवकाश वेतन के लिए अंशदान का भुगतान कर दिया गया हो।

मूल नियम 60

अवकाश स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकारी

विशेष दिव्यांगता अवकाश के अतिरिक्त मूल नियमों के अन्तर्गत देय अन्य अवकाश शासन के अधीनस्थ उन प्राधिकारियों द्वारा प्रदान किया जा सकता है जिन्हें राज्यपाल नियम या आदेश द्वारा निर्दिष्ट कर दें।

मूल नियम 66

विशेष दिव्यांगता अवकाश राज्यपाल द्वारा स्वीकृत किया जा सकता है।

मूल नियम 83

अराजपत्रित सरकारी सेवकों को विशेष दिव्यांगता अवकाश के अतिरिक्त मूल नियमों के अन्तर्गत अनुमन्य कोई भी अन्य अवकाश उस प्राधिकारी द्वारा जिसका कर्तव्य उस पद को, यदि वह रिक्त होता, भरने का होता या वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-दो (भाग 2 से 4) के भाग 4 (विवरण पत्र-iv के क्रम संख्या 5, 8 तथा 9) में उल्लिखित किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रतिनिहित अधिकार सीमा के अधीन रहते हुए प्रदान किया जा सकता है।

सहायक नियम 35

राजपत्रित अधिकारियों को अवकाश देने के लिए साधारणतया शासन की स्वीकृति की आवश्यकता है, किन्तु वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-दो के भाग-4 (विवरण पत्र-iv के क्रम संख्या 6, 7, 8 व 9) में उल्लिखित किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रतिनिहित अधिकार सीमा के अधीन रहते हुए प्रदान किया जा सकता है।

सहायक नियम 36

सभी विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ राज्यपत्रित अधिकारियों को 60 दिन तक का अवकाश स्वीकृत कर सकते हैं बशर्ते प्रतिस्थानी की आवश्यकता न हो।

(शासनादेश संख्या-सा-4-944/दस-66-73, दिनांक 16-08-1973)

सभी विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ राजपत्रित अधिकारियों को प्राधिकृत चिकित्सक द्वारा प्रदत्त नियमित प्रमाण-पत्र के आधार पर तीन माह की अवधि तक का चिकित्सा प्रमाण पत्र पर अवकाश प्रदान कर सकते हैं।

(कार्यालय ज्ञाप संख्या-सा-4-1752/दस-200 (2) -77 दिनांक 20-6-1978)

मातृत्व अवकाश संबंधित विभागाध्यक्ष द्वारा अथवा किसी ऐसे निम्नतर अधिकारी द्वारा जिसे इसके लिए अधिकार प्रतिनिहित किया गया हो, प्रदान किया जा सकता है।

सहायक नियम 153

अवकाश का दावा अधिकार के रूप में नहीं

किसी अवकाश का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता है। जब जन सेवाओं की अनिवार्यतायें ऐसी अपेक्षा करती हों, तो किसी भी प्रकार के अवकाश को निरस्त करने या अस्वीकृत करने का अधिकार अवकाश प्रदान करने हेतु सक्षम प्राधिकारी के पास सुरक्षित है।

मूल नियम 67

अवकाश का प्रारम्भ एवं समाप्ति

अवकाश साधारणतया कार्यभार छोड़ने के दिन से प्रारम्भ होता है तथा कार्यभार ग्रहण करने की तिथि के पूर्व दिवस को समाप्त होता है। अवकाश के प्रारम्भ होने के ठीक पहले व अवकाश समाप्ति के तुरन्त पश्चात पड़ने वाले रविवार व अन्य मान्यता प्राप्त अवकाशों को अवकाश के साथ उपभोग करने की स्वीकृति अवकाश स्वीकृत करने वाले प्राधिकारी द्वारा दी जा सकती है।

मूल नियम 68

अवकाश अवधि में अन्य व्यवसाय

सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति प्राप्त किये बिना कोई सरकारी सेवक अवकाश काल में कोई लाभप्रद व्यवसाय या नौकरी नहीं कर सकता है।

मूल नियम 69

अवकाशाधीन सरकारी सेवक को वापस बुलाया जाना

जन सेवाओं की अनिवार्यता होने पर अवकाश प्रदान करने वाले प्राधिकारी को अवकाशाधीन सरकारी सेवक को अवकाश का पूर्ण उपभोग किये बिना ड्यूटी पर वापस बुलाने का अधिकार है। वापसी के आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए कि ड्यूटी पर लौटना अवकाशाधीन सेवक की स्वेच्छा पर निर्भर है अथवा वह अनिवार्य है। यदि उक्त वापसी ऐच्छिक हो तो इस संबंध में कर्मचारी को किसी प्रकार की छूट अनुमन्य नहीं होगी, परन्तु यदि वापसी के लिए बाध्य किया जाता है तो उसे निम्नानुसार सुविधा ग्राह्य होगी- यदि अवकाश का उपयोग भारतवर्ष में ही किया जा रहा हो तो वापसी के लिए प्रस्थान के दिवस से उसे ड्यूटी पर माना जायेगा एवं वापसी के लिए सामान्य यात्रा भत्ता अनुमन्य होगा, परन्तु योगदान की तिथि तक उसे अवकाश वेतन ही देय होगा।

मूल नियम 70

अवकाश से वापस बुलाने पर यात्रा भत्ता निम्न शर्तों के पूरा होने पर ही देय होगा-

1- यदि वह 60 दिन से अधिक के अवकाश पर गया हो तो कम से कम उसकी आधी अवधि का अवकाश निरस्त किया जाये।

2- यदि वह 60 दिन तक की अवधि के लिए अवकाश पर गया हो तो कम से कम 30 दिन का अवकाश निरस्त किया जाये।

(नियम 51, वित्तीय नियम संग्रह खण्ड–तीन)

स्वस्थता प्रमाण पत्र (Fitness Certificate)

चिकित्सा प्रमाण पत्र पर अवकाश का उपभोग करने के उपरान्त किसी भी कर्मचारी को सेवा में योगदान करने की अनुमति तब तक नहीं दी जा सकती जब तक कि उसके द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर अपना स्वस्थता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता। यदि सक्षम अधिकारी चाहे तो अस्वस्थता के आधार पर लिये गये किसी अन्य श्रेणी के अवकाश के मामले में भी उपर्युक्त स्वस्थता प्रमाण पत्र मांग सकता है।

मूल नियम 71

अवकाश समाप्ति के पूर्व ड्यूटी पर वापसी

अवकाश स्वीकर्ता अधिकारी की अनुमति के बिना कोई भी सरकारी सेवक स्वीकृत अवकाश की समाप्ति के 14 दिन से अधिक समय पूर्व ड्यूटी पर वापस नहीं लौट सकता है।

मूल नियम–72

अवकाश की समाप्ति के पश्चात अनुपस्थिति

यदि कोई राजकीय कर्मचारी अवकाश अवधि की समाप्ति के उपरान्त भी अनुपस्थित रहता है तो उसे ऐसी अनुपस्थिति की अवधि के लिए कोई अवकाश वेतन देय नहीं होगा और उक्त अवधि को उसके अवकाश लेखे से यह मानते हुए घटा दिया जायेगा जैसे कि उक्त अवधि अर्ध औसत वेतन पर देय अवकाश थी, जब तक अवकाश अवधि शासन द्वारा बढ़ा न दी गयी हो। अवकाशोपरान्त जानबूझकर सेवा से अनुपस्थिति मूल नियम 15 के प्रयोजन हेतु दुर्व्यवहार मानी जायेगी।

मूल नियम 73

एक प्रकार के अवकाश के साथ/क्रम में दूसरे प्रकार के अवकाश की अनुमन्यता

किसी एक प्रकार के अवकाश को दूसरे प्रकार के अवकाश के साथ अथवा क्रम में स्वीकृत किया जा सकता है।

(मूल नियम 81 ख(6), 83(4), सहायक नियम–154, 156 तथा 157–क(5))

अवकाश की प्रकृति में परिवर्तन

अवकाश प्रदान करने वाले प्राधिकारी को अवकाश की प्रकृति में परिवर्तन करने का अधिकार नहीं है।

मूल नियम 87–क तथा सहायक नियम 157 क से संबंधित राज्यपाल के आदेश

सरकारी सेवक जिन्हें अवकाश प्रदान नहीं किया जा सकता

1- सरकारी सेवक को निलम्बन की अवधि में अवकाश प्रदान नहीं किया जा सकता।

मूल नियम 55

2- उस सरकारी सेवक को अवकाश स्वीकृत नहीं करना चाहिए, जिसे दुराचरण अथवा सामान्य अक्षमता के कारण सेवा से पदच्युत किया जाना या हटाया जाना अपेक्षित हो यदि उस अवकाश के प्रभावस्वरूप पदच्युत किये जाने या हटाये जाने की तिथि स्थगित हो जाये या जिसका आचरण उसी समय या निकट भविष्य में उसके विरुद्ध विभागीय जांच का विषय बनने वाला हो।

सहायक नियम 101

अवकाश वेतन तथा अवकाश अवधि में भत्तों की देयता

मूल नियम 87–क के अनुसार अर्जित अवकाश तथा चिकित्सा प्रमाण पत्र अवकाश के मामलों में अवकाश पर जाने से ठीक पूर्व आहरित वेतन की दरों पर अवकाश वेतन अनुमन्य होता है। इसी प्रकार मातृत्व अवकाश, बाल्य देखभाल अवकाश एवं दत्तक ग्रहण अवकाश की अवधि में अवकाश पर जाने के ठीक पूर्व आहरित वेतन की दरों पर अवकाश वेतन देय होता है। (मूल नियम 153 तथा शासनादेश संख्या–जी–2–2017/दस–2008–216/79, दिनांक 08 दिसम्बर, 2008) अन्य अवकाश की अवधि में देय अवकाश के वेतन का उल्लेख सम्बन्धित अवकाश के शीर्षक में किया गया है।

अवकाश अवधि में देय प्रतिकर भत्तों के भुगतान के संबंध में मूल नियम 93 तथा सहायक नियम 147, 149, 150 तथा 152 में व्यवस्था दी गई है। जो विशेष वेतन अथवा भत्ते किसी विशेष को करने के कारण देय होते हैं उन्हें अवकाश अवधि में देने का कोई औचित्य नहीं है। परन्तु जो विशेष वेतन तथा भत्ते व्यक्तिगत योग्यता के आधार पर देय होते हैं (स्नातकोत्तर भत्ता, परिवार कल्याण भत्ता, वैयक्तिक योग्यता भत्ता) वे सवेतन अवकाश अवधि में दिये जाने चाहिए। विशेष वेतन तथा अन्य भत्तों का भुगतान अवकाश अवधि के अधिकतम 120 दिन की सीमा तक अनुमन्य होगा।

शासनादेश संख्या–सा–4–296/दस–88–216–19 दिनांक 08–03–1988

अवकाश प्रदान करना

अवकाश प्रार्थना पत्रों पर निर्णय करते समय सक्षम अधिकारी निम्न बातों का ध्यान रखेंगे—

क– कर्मचारी जिसके बिना उस समय सरलता से कार्य चलाया जा सकता है।
ख– अन्य कर्मचारियों के अवकाश की अवधि।
ग– पिछली बार लिये गये अवकाश से वापस आने के पश्चात सेवा की अवधि।
घ– किसी आवेदक को पूर्व में स्वीकृत अवकाश से अनिवार्य रूप से वापस तो नहीं बुलाया गया।
ङ– आवेदक को पूर्व में जानबूझ कर अवकाश अस्वीकृत तो नहीं किया गया।

सहायक नियम 99

1– अर्जित अवकाश

अर्जित अवकाश स्थायी तथा अस्थायी दोनों प्रकार के सरकारी सेवकों द्वारा समान रूप से अर्जित किया जाता है, तथा समान शर्तों के अधीन उन्हें स्वीकृत किया जाता है।

मूल नियम 81–ख (1) सहायक नियम 157–क (1)

अवकाश अवधि व अर्जित अवकाश की प्रक्रिया

सरकारी सेवक के अर्जित अवकाश लेखे में पहली जनवरी को 16 दिन तथा पहली जुलाई को 15 दिन जमा किया जायेगा।

अवकाश का हिसाब लगाते समय दिन के किसी अंश को निकटतम दिन पर पूर्णांकित किया जाता है, ताकि अवकाश का हिसाब पूरे दिन के आधार पर रहे।

शासनादेश संख्या–सा–4–392/दस–94–203–86, दिनांक: 1 जुलाई 1999 के अनुसार सरकारी सेवकों के अवकाश खाते में अर्जित अवकाश जमा करने की अधिकतम सीमा 300 दिन है।

बीच छमाही में नियुक्ति होने पर उस छमाही में सेवा के प्रत्येक पूर्ण कैलेण्डर मास के लिए 2–1/2 (ढाई) दिन प्रतिमास की दर से अवकाश पूर्ण दिन के आधार पर जमा किया जाता है। इसी प्रकार मृत्यु सहित किसी भी कारण से सेवा से विलग होने वाली छमाही में सेवा में रहने के दिनांक तक की गई सेवा के प्रत्येक पूर्ण कैलेण्डर मास के लिए 2–1/2 दिन प्रतिमास की दर से पूरे दिन के आधार पर अवकाश देय होता है।

जब किसी छमाही में असाधारण अवकाश का उपभोग किया जाता है तो संबंधित सरकारी सेवक के अवकाश लेखे में अगली छमाही के लिए जमा किये जाने वाला अर्जित अवकाश असाधारण अवकाश की अवधि के 1/10 की दर से 15 दिन की अधिकतम सीमा के अधीन रहते हुए (पूरे दिन के आधार पर) कम कर दिया जाता है।

शासकीय ज्ञाप संख्या–सा–4–1071 एवं 1072/दस–1992–201/76 दिनांक 21 दिसम्बर 1992 मूल नियम 81ख (1) एवं सहायक नियम 157–क (1)

अवकाश लेखा

अर्जित अवकाश के संबंध में सरकारी सेवकों के अवकाश लेखे प्रपत्र-11घ में  रखे जायेंगे।

मूल नियम–81 ख (1) (8)

अर्जित अवकाश की एक बार में स्वीकृत करने की अधिकतम सीमा

यदि सम्पूर्ण अवकाश भारत में व्यतीत किया जा रहा हो — 120 दिन

यदि सम्पूर्ण अवकाश भारत के बाहर व्यतीत किया जा रहा हो — 180 दिन

अवकाश की कुछ अवधि भारत में तथा कुछ अवधि भारत के बाहर व्यतीत किये जाने पर भी 180 दिन तक का अवकाश इस प्रतिबन्ध के अधीन स्वीकृत किया जा सकता है कि भारत में व्यतीत की गयी अवकाश अवधि 120 दिन से अधिक नहीं होगी।

मूल नियम–81 ख(1)(दस) सहायक नियम 157(क)(1) (ग्यारह)

अवकाश वेतन

अवकाश काल में सरकारी सेवक को अवकाश पर प्रस्थान के ठीक पहले प्राप्त होने वाले वेतन के बराबर अवकाश वेतन ग्राह्य होता है।

मूल नियम–87-क (1) तथा सहायक नियम 157-क(6)(क)

अवकाश वेतन अग्रिम का भुगतान

शासनादेश संख्या: ए–1–1668/दस–3–1(4)–65 दिनांक 13 अक्टूबर 1978 के अनुसार सरकारी कर्मचारियों को उनके अवकाश पर जाने के समय अवकाश वेतन अग्रिम की धनराशि को भुगतान करने की अनुमति निम्न शर्तों के अधीन दी जा सकती है:–

1– यह अग्रिम धनराशि कम से कम 30 दिन या उससे अधिक की अवधि के केवल अर्जित अवकाश या निजी कार्य पर अवकाश के मामले में देय होगी।

2– यह अग्रिम धनराशि ब्याज रहित होगी।

3– अग्रिम की धनराशि अन्तिम बार लिये गये मासिक वेतन, जिसमें महँगाई भत्ता, अतिरिक्त महँगाई भत्ता (अन्य भत्ते छोड़कर) भी सम्मिलित होंगे, के बराबर होगी।

4– उपर्युक्त बिन्दु–1 में उल्लिखित अवकाश अवधि यदि 30 दिन से अधिक और 120 दिन से अधिक न हो तो उस दशा में भी पूरी अवकाश अवधि का, लेकिन एक समय में केवल एक माह का अवकाश वेतन अग्रिम उपर्युक्त बिन्दु 3 में उल्लिखित दर से स्वीकृत किया जा सकता है।

5– अवकाश वेतन अग्रिम से सामान्य कटौतियाँ कर ली जानी चाहिये।

6– यह अग्रिम धनराशि स्थायी तथा अस्थायी सरकारी कर्मचारी को देय होगी किन्तु अस्थायी कर्मचारी के मामले में यह धनराशि वित्तीय नियम संग्रह खण्ड–पाँच भाग–1 के पैरा 242 में दी गई अतिरिक्त शर्तों के अधीन मिलेगी।

7– राजपत्रित अधिकारियों को अग्रिम धनराशि लेने के लिए प्राधिकार पत्र की आवश्यकता नहीं होगी। भुगतान स्वीकृति के आधार पर किया जायेगा।

8– वित्तीय नियम संग्रह खण्ड–पाँच भाग–1 के पैरा 249 (ए) के अधीन सरकारी कर्मचारियों के लिए अग्रिम धनराशियाँ स्वीकृत करने के लिए सक्षम अधिकारी अवकाश वेतन का अग्रिम भी स्वीकृत कर सकते हैं। यह प्राधिकारी अपने लिए भी ऐसी अग्रिम धनराशि स्वीकृत कर सकता है।

9– इस पूरी अग्रिम धनराशि का समायोजन सरकारी कर्मचारी के अवकाश वेतन के प्रथम बिल से किया जायेगा। यदि पूरी अग्रिम धनराशि का समायोजन इस प्रकार नहीं हो सकता है तो शेष धनराशि की वसूली वेतन या अवकाश वेतन से अगले भुगतान के समय की जायेगी।

अर्जित अवकाश के लिए आवेदन पत्र

टिप्पणी : (1) कालम संख्या 1 से 9 तक की प्रविष्टियां सभी आवेदकों द्वारा (चाहे वे राजपत्रित अधिकारी हों अथवा अराजपत्रित कर्मचारी हों) भरी जायेंगी।

1– आवेदक का नाम …………………………………………………………………………

2– लागू अवकाश नियम …………………………………………………………………….

3– पदनाम …………………………………………………………………………………….

4– विभाग / कार्यालय का नाम …………………………………………………………….

5– वेतन ……………………………………………………………………………………….

6– अवकाश किस दिनांक से किस दिनांक तक अपेक्षित है तथा उसकी प्रकृति
दिनांक ………………………….. से ………………………….. तक
प्रकृति ……………………………………………………

7– अवकाश मांगे जाने का कारण …………………………………………………………..

8– पिछली बार अवकाश किस दिनांक से किस दिनांक तक लिया गया तथा उसकी प्रकृति
दिनांक ………………………….. से ………………………….. तक
प्रकृति ……………………………………………………

9– अवकाश की अवधि में पता ……………………………………………………………………

दिनांक ……………………….

……………………………………………………

आवेदक के हस्ताक्षर


11 अग्रसारण अधिकारी की अभ्युक्ति / संस्तुति –दिनांक ……………………….

 हस्ताक्षर :
पदनाम :


12– फाइनेंशियल हैंड बुक खण्ड–दो, भाग–2 से 4 के सहायक नियम–81 के अनुसार सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट।

(क) प्रमाणित किया जाता है कि फाइनेंशियल हैंड बुक खण्ड–2, भाग–2 से 4 के मूल नियम/सहायक नियम के अधीन दिनांक ………………………….. से ………………………….. तक आवेदित अर्जित अवकाश देय है।

हस्ताक्षर :

दिनांक ……………………….

पदनाम :

2– निजी कार्य पर अवकाश

निजी कार्य पर अवकाश अर्जित अवकाश की ही भांति तथा उसके लिये निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक कैलेण्डर वर्ष के लिए 31 दिन 2 छमाही किस्तों में जमा किया जाता है। नियुक्ति की प्रथम छःमाही तथा सेवा से पृथक होने वाली छमाही के लिए जमा होने वाले अवकाश का आगणन तथा असाधारण अवकाश के उपयोग करने पर अवकाश की कटौती विषयक प्रक्रिया भी वही है, जो अर्जित अवकाश के विषय में है।

अधिकतम अवकाश अवधि तथा देय अवकाश

स्थायी सरकारी सेवक

1- यह अवकाश 365 दिन तक की अधिकतम सीमा के अधीन जमा किया जाता है।

2- सम्पूर्ण सेवाकाल में कुल मिलाकर 365 दिन तक का ही अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।

3- किसी एक समय में स्वीकृत की जा सकने योग्य अधिकतम सीमा निम्नानुसार है—

पूरा अवकाश भारत में व्यतीत किये जाने पर — 90 दिन

पूरा अवकाश भारत से बाहर व्यतीत किये जाने पर — 180 दिन

अवकाश की कुछ अवधि भारत में तथा कुछ अवधि भारत के बाहर व्यतीत किये जाने पर भी 180 दिन तक का अवकाश इस प्रतिबन्ध के अधीन स्वीकृत किया जा सकता है कि भारत में व्यतीत की गयी अवकाश अवधि 90 दिन से अधिक नहीं होगी।

मूल नियम 81–ख (3)

शासकीय ज्ञाप संख्या–सा–4–1071/दस–1992–2001/76 दिनांक 21 दिसम्बर 1992

अस्थायी सरकारी सेवक

सम्पूर्ण अस्थायी सेवाकाल में कुल मिलाकर 120 दिन तक का अवकाश प्रदान किया जा सकता है।

अस्थायी सेवकों को निजी कार्य पर अवकाश तब तक अनुमन्य नहीं होगा जब तक कि उनके द्वारा दो वर्ष की निरन्तर सेवा पूरी न कर ली गयी हो।

अस्थायी सरकारी सेवकों के अवकाश खातों में निजी कार्य पर अवकाश किसी अवसर पर 60 दिन से अधिक जमा नहीं होगा।

किसी सरकारी सेवक को एक बार में निजी कार्य पर अवकाश स्वीकृत किये जाने की अधिकतम अवधि सात दिन होगी।

अवकाश स्वीकृति आदेश में अतिशेष अवकाश इंगित किया जायेगा।

सहायक नियम 157–क (3)

शासकीय ज्ञाप संख्या–सा–4–1072/दस–1992–2001/76 दिनांक 21 दिसम्बर 1992

अवकाश लेखा

निजी कार्य पर अवकाश के संबंध में सरकारी सेवकों के अवकाश लेखे प्रपत्र 11–ङ में रखे जायेंगे।

सहायक नियम–157–क(3)(दस)

अवकाश वेतन

निजी कार्य पर अवकाश काल में वह अवकाश वेतन मिलता है जो अर्जित अवकाश के लिए अनुमन्य होने वाले अवकाश वेतन की धनराशि के आधे के बराबर हो।

मूल नियम 87–क (2) तथा सहायक नियम 157–क(6) (ख)

3चिकित्सा प्रमाणपत्र पर अवकाश

स्थायी सरकारी सेवक

सम्पूर्ण सेवाकाल में 12 माह तक का चिकित्सा प्रमाणपत्र पर अवकाश नियमों द्वारा निर्दिष्ट चिकित्सकों द्वारा प्रदान किये गये चिकित्सा प्रमाण पत्र पर स्वीकृत किया जा सकता है।

उपर्युक्त 12 माह का अवकाश समाप्त होने के पश्चात आपवादिक मामलों में चिकित्सा परिषद की संस्तुति पर सम्पूर्ण सेवाकाल में कुल मिलाकर 6 माह का चिकित्सा प्रमाण पत्र पर अवकाश और स्वीकृत किया जा सकता है।

मूल नियम 81–ख (2)

अस्थायी सरकारी सेवक

ऐसे अस्थायी सेवकों को जो तीन वर्ष अथवा उससे अधिक समय से निरन्तर कार्यरत रहे हों, नियुक्ति नियमित हो, कार्य एवं आचरण संतोषजनक हो, सत्यनिष्ठा प्रमाणित हो तथा उनके विरुद्ध कोई अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित या विचाराधीन न हो, स्थायी सरकारी सेवकों के ही समान 12 महीने तक चिकित्सा प्रमाण पत्र पर अवकाश की सुविधा है, परन्तु 12 माह के पश्चात स्थायी सेवकों को प्रदान किया जा सकने वाला 6 माह का अतिरिक्त अवकाश इन्हें अनुमन्य नहीं है।

शेष सभी अस्थायी सरकारी सेवकों को चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर सम्पूर्ण अस्थायी सेवाकाल में चार माह तक अवकाश प्रदान किया जा सकता है।

सभी (स्थायी एवं अस्थायी) कार्मिकों के मामलों में प्राधिकृत चिकित्सा प्राधिकारी की संस्तुति पर सक्षम अधिकारी द्वारा साठ दिन तक की छुट्टी स्वीकृत की जा सकती है। इस अवधि से अधिक छुट्टी तब तक स्वीकृत नहीं की जा सकती, जब तक सक्षम अधिकारी को यह समाधान न हो जाये कि आवेदित छुट्टी की समाप्ति पर सरकारी कर्मचारी के कार्य पर वापस आने योग्य हो जाने की समुचित सम्भावना है। यदि सरकारी कर्मचारी की बीमारी के उपचार के मध्य मृत्यु हो जाती है तो उसे सक्षम अधिकारी चिकित्सा अवकाश स्वीकृत करेगा यदि चिकित्सा अवकाश अन्यथा देय है।

मूल नियम–81–ख(2)(2), सहायक नियम–87 तथा 157–क(2)(2) एवं शासनादेश सं०–सा–4–525/दस–96–201/76 टी०सी०, दिनांक 19–8–1996

अवकाश वेतन

1– स्थायी सरकारी सेवकों तथा तीन वर्षों से निरन्तर कार्यरत अस्थायी सेवकों को 12 माह तक की अवधि तथा शेष अस्थायी सेवकों को चार माह तक की अवकाश अवधि के लिये वह अवकाश वेतन अनुमन्य होगा, जो उसे अर्जित अवकाश का उपभोग करने की दशा में अवकाश वेतन के रूप में देय होता।

2– स्थायी सेवकों को 12 माह का अवकाश समाप्त होने के उपरान्त देय अवकाश के लिये अर्जित अवकाश की दशा में अनुमन्य अवकाश वेतन की आधी धनराशि अवकाश वेतन के रूप में अनुमन्य होती है। मूल नियम 87–क (2)

चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रदान करने हेतु अधिकृत चिकित्सकों का निर्धारण

अधिकारी/कर्मचारी  प्राधिकृत चिकित्सक
समूह क के अधिकारी
  • मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य/रोग से संबंधित विभाग के प्रोफेसर
  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी
  • राजकीय अस्पताल के प्रमुख/मुख्य/वरिष्ठ अधीक्षक
  • राजकीय अस्पताल के मुख्य/वरिष्ठ कन्सल्टेंट/कन्सल्टेंट
समूह ख के अधिकारी
  • मेडिकल कालेज के रोग से संबंधित विभाग के प्रोफेसर/रीडर
  • राजकीय अस्पताल के प्रमुख/मुख्य/वरिष्ठ अधीक्षक
  • राजकीय अस्पताल के मुख्य/वरिष्ठ कन्सल्टेंट/कन्सल्टेंट
समूह ग व घ के कर्मचारी
  • मेडिकल कालेज के रोग से संबंधित विभाग के रीडर/लेक्चरर
  • राजकीय चिकित्सालयों/औषधालयों/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों / प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कार्यरत समस्त श्रेणी के चिकित्साधिकारी

शासनादेश संख्या– 761/45-7-1947 दिनांक 22 अप्रैल 1987
शासनादेश संख्या– 865/5-7-949/76 दिनांक 6 मई 1988

राजपत्रित अधिकारी के चिकित्सा प्रमाण पत्र अवकाश या उसके प्रसार के लिए सहायक नियम 89 में उल्लिखित प्रपत्र में प्रमाण-पत्र प्राप्त करना चाहिए। प्राधिकृत चिकित्साधिकारी द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र पर्याप्त होगा यदि संस्तुत अवकाश की अवधि तीन माह से अनधिक हो तथा चिकित्साधिकारी यह प्रमाणित कर दें कि उनकी राय में प्रार्थी को चिकित्सा परिषद के समक्ष उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है। जब प्राधिकृत चिकित्सा अधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र में सरकारी सेवक के चिकित्सा परिषद के समक्ष उपस्थित होने की संस्तुति की जाय अथवा संस्तुत अवकाश की अवधि तीन माह से अधिक हो या तीन माह या उससे कम अवकाश को तीन माह से आगे बढ़ाया जाये तो संबंधित राजपत्रित सरकारी सेवक को उपर्युक्त वर्णित प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के बाद अपने रोग के विवरण पत्र की दो प्रतियाँ लेकर चिकित्सा परिषद के सम्मुख उपस्थित होना होता है तथा सहायक नियम 91 में दिये गये प्रारूप पर चिकित्सा परिषद से प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता है।

ऐसे प्रकरणों में जहाँ संस्तुत अवकाश की अवधि तीन माह से अधिक हो अथवा तीन माह या उससे कम अवकाश को तीन माह से आगे बढ़ाया जाये, चिकित्सा परिषद द्वारा चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रदान करते समय उल्लेख कर दिया जाना चाहिए कि संबंधित अधिकारी को ड्यूटी पर लौटने के लिए वांछित स्वस्थता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिये पुनः परिषद के समक्ष उपस्थित होना है या वह उस प्रमाण पत्र को प्राधिकृत चिकित्सा अधिकारी से प्राप्त कर सकता है।

सहायक नियम 91 की टिप्पणी

अराजपत्रित सरकारी कर्मचारियों के चिकित्सीय प्रमाण पत्र पर अवकाश या अवकाश के प्रसार के लिए दिये गये आवेदन पत्र के साथ निम्न प्रपत्र पर किसी सरकारी चिकित्साधिकारी द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र लगा होना चाहिए—

आवेदक के हस्ताक्षर ………………………………

मैं श्री …………………………………………………….. के मामले की सावधानी से व्यक्तिगत परीक्षा करने पर प्रमाणित करता हूँ कि श्री …………………………………………………….. जिनके हस्ताक्षर ऊपर दिये हुए हैं …………………………………………………….. से पीड़ित हैं। रोग के इस समय वर्तमान लक्षण हैं ……………………………………………………..। मेरी राय में रोग का कारण …………………………………………………….. है। आज की तिथि तक गिनकर रोग की अवधि ………………………….. दिनों की है।

जैसा कि श्री …………………………………………………….. से पूछने पर ज्ञात हुआ, रोग का पूर्ण विवरण निम्नलिखित है ……………………………………………………..। मैं समझता हूँ कि पूर्णरूप से स्वास्थ्य लाभ करने के लिये दिनांक ………………………….. से ………………………….. तक की अवधि के लिए इनकी ड्यूटी से अनुपस्थिति नितान्त आवश्यक है।

चिकित्साधिकारी

सहायक नियम 95

श्रेणी घ के सरकारी सेवकों के चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर अवकाश या अवकाश के प्रसार के लिए दिये गये आवेदन पत्र के समर्थन में अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारी जिस प्रकार के प्रमाण पत्र को पर्याप्त समझें, स्वीकार कर सकते हैं।

सहायक नियम 98

किसी सरकारी कर्मचारी से जिसने भारत में चिकित्सीय प्रमाण पत्र पर अवकाश लिया हो, ड्यूटी पर लौटने से पूर्व निम्नलिखित प्रपत्र पर स्वस्थता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जायेगी—

हम/मैं ……………………………………………….. एतद्द्वारा प्रमाणित करते हैं/करता हूँ कि हमने/मैंने …………………………………. विभाग के श्री ……………………………………………….. की सावधानी से परीक्षा कर ली है और यह पता लगा है कि वह अब अपनी बीमारी से मुक्त हो गये हैं और सरकारी सेवा में ड्यूटी पर लौटने योग्य  हैं।

हम/मैं यह भी प्रमाणित करते हैं/करता हूँ कि उपर्युक्त निर्णय पर पहुँचने से पूर्व हमने/मैंने मूल चिकित्सीय प्रमाणपत्र तथा मामले के विवरण (अथवा अवकाश स्वीकृत करने वाले अधिकारी द्वारा प्रमाणित इनकी प्रतिलिपियों) जिसके आधार पर अवकाश स्वीकृत किया गया था, का परीक्षण कर लिया है तथा अपने निर्णय पर पहुँचने से पूर्व इन पर विचार कर लिया है।

सहायक नियम 43

4–मातृत्व अवकाश

मातृत्व अवकाश स्थायी अथवा अस्थायी महिला सरकारी सेवकों को निम्न दो अवसरों पर निर्धारित शर्तों के अधीन प्रदान किया जाता है:—

1–प्रसूति के मामलों में

  • यह अवकाश सम्पूर्ण सेवाकाल में दो बार अनुमन्य है।
  • प्रसूतावस्था पर अवकाश प्रारम्भ होने के दिनांक से 180 दिन तक अवकाश देय है।
  • अन्तिम बार स्वीकृत अवकाश के समाप्त होने के दिनांक से दो वर्ष व्यतीत हो चुके हों तभी दुबारा यह अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।
  • यदि किसी महिला सरकारी सेवक के दो या अधिक जीवित बच्चे हों तो उसे यह अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता, भले ही उसे अवकाश अन्यथा देय हो। यदि महिला सरकारी सेवक के दो जीवित बच्चों में से कोई भी बच्चा जन्म से किसी असाध्य रोग से पीड़ित हो या दिव्यांग या अपंग हो अथवा बाद में इन बीमारियों/विकृतियों से ग्रस्त हो जाये तो सम्पूर्ण सेवाकाल में दो बार अनुमन्यता की शर्तों के अधीन रहते हुए उसे अपवादस्वरूप एक अतिरिक्त मातृत्व अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।

2–गर्भपात एवं गर्भस्राव के मामलों में

गर्भपात के मामलों में जिसके अन्तर्गत गर्भस्राव भी है, प्रत्येक अवसर पर 6 सप्ताह तक का अवकाश देय है। अवकाश के प्रार्थना पत्र के समर्थन में प्राधिकृत चिकित्सक का प्रमाण पत्र संलग्न होना चाहिए। गर्भपात/गर्भस्राव के प्रकरणों में अनुमन्य मातृत्व अवकाश के सम्बन्ध में अधिकतम तीन बार अनुमन्य होने का प्रतिबन्ध शासन के पत्रांक संख्या–4-84/दस-90-216-79 दिनांक 3 मई 1990 द्वारा समाप्त कर दिया गया है।

मूल नियम 101 एवं सहायक नियम 153 तथा शासनादेश सं० जी–2–2017–दस–2008–79, दिनांक 08 दिसम्बर, 2008

मातृत्व अवकाश को किसी प्रकार के अवकाश लेखे से नहीं घटाया जाता है तथा अन्य प्रकार की छुट्टी के साथ मिलाया जा सकता है।

सहायक नियम 154

अवकाश वेतन

मातृत्व अवकाश की अवधि में अवकाश पर प्रस्थान करने से ठीक पहले प्राप्त वेतन के बराबर अवकाश वेतन अनुमन्य होता है।

सहायक नियम 153

5–असाधारण अवकाश

असाधारण अवकाश निम्न विशेष परिस्थितियों में स्वीकृत किया जा सकता है—

(i) जब अवकाश नियमों के अधीन कोई अन्य अवकाश देय न हो।

(ii) अन्य अवकाश देय होने पर भी संबंधित सरकारी सेवक असाधारण अवकाश प्रदान करने के लिए आवेदन करे।

यह अवकाश लेखे से नहीं घटाया जाता है। मूल नियम 85

स्थायी सरकारी सेवक

स्थायी सरकारी सेवक को असाधारण अवकाश किसी एक समय में मूल नियम 18 के उपबन्धों के अधीन अधिकतम 5 वर्ष तक की अवधि के लिए स्वीकृत किया जा सकता है।

किसी भी अन्य प्रकार के अवकाश के क्रम में स्वीकृत किया जा सकता है। मूल नियम 81—ख (6)

अस्थायी सरकारी सेवक

अस्थायी सरकारी सेवक को देय असाधारण अवकाश की अवधि किसी एक समय में निम्नलिखित सीमाओं से अधिक न होगी—

3 मास

6 मास– यदि संबंधित सरकारी सेवक ने तीन वर्ष की निरन्तर सेवा अवकाश अवधि सहित पूरी कर ली हो तथा अवकाश के समर्थन में नियमों के अधीन अपेक्षित चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया हो।

18 मास– यदि संबंधित सरकारी सेवक ने एक वर्ष की निरन्तर सेवा पूरी कर ली हो, और वह क्षय रोग अथवा कुष्ठ रोग का उपचार करा रहा हो तथा सम्बन्धित चिकित्सक द्वारा प्रदत्त प्रमाण पत्र संलग्न किया हो।

24 मास– सम्पूर्ण अस्थायी सेवा की अवधि में 36 मास की अधिकतम सीमा के अधीन रहते हुए जनहित में भारत अथवा विदेश में अध्ययन करने के लिए इस प्रतिबन्ध के अधीन देय है कि संबंधित सेवक ने तीन वर्ष की निरन्तर सेवा पूरी कर ली है।

सहायक नियम 157क (4)

अवकाश वेतन

असाधारण अवकाश की अवधि के लिए कोई अवकाश वेतन देय नहीं है।

मूल नियम 85, 87(क) (4) एवं सहायक नियम 157क(6) (ग)

6–चिकित्सालय अवकाश (मूल नियम 101 तथा सहायक नियम 155 व 156)

अधीनस्थ सेवाओं के निम्नलिखित श्रेणी के कर्मचारियों को, चाहे स्थायी हों या अस्थायी, जिनकी ड्यूटी में दुर्घटना या बीमारी का विशेष खतरा हो, अस्वस्थता के कारण चिकित्सालय अवकाश प्रदान किया जा सकता है:—

(क) स्थायी सेवा में सभी विभागों के रक्षी (गार्ड),

(ख) विधान मंडल के किसी अधिनियम के अधीन भर्ती किए गए पुलिस विभाग के कार्यकारी सरकारी कर्मचारी,

(ग) कारागार (जेल) विभाग के प्रधान प्रहरी (हेड वार्डर), प्रहरी और अर्दली तथा पागलखानों के रक्षी (गार्ड), प्रहरी (वार्डर), पट्टी बांधने वाले (ड्रेसर) और कम्पाउण्डर जिनमें महिला कर्मचारी सम्मिलित हैं,

(घ) वन विभाग के अधीनस्थ कर्मचारी जिनमें राजि लिपिक (रेंज क्लर्क) सम्मिलित हैं किन्तु अन्य लिपिक सम्मिलित नहीं हैं,

(ङ) पशुपालन विभाग के सईस,

(च) राजकीय मुद्रणालय (प्रेस) का कोई कर्मचारी चाहे वह नियत वेतन पर हो या ठेके की दरों पर,

(छ) राजकीय प्रयोगशालाओं में सेवायोजित अधीनस्थ कर्मचारी,

(ज) राजकीय मशीनरी के कार्य सम्पादन में सेवायोजित अधीनस्थ कर्मचारी,

(झ) तराई तथा भावर में नौकरी करने वाले चपरासी तथा अन्य सरकारी कर्मचारी,

(ट) नहर के शीर्ष निर्माण कार्यों तथा पूर्वी यमुना नहर की तीव्र धारा समपार पर  सिंचाई विभाग द्वारा नियुक्त टिंडल, रेगुलेशन बेलदार एवं मल्‍लाह तथा साथ ही मुख्य शारदा नहर तथा देवहा बहगुल पोषक नहर में नियुक्‍त अधीनस्थ कर्मचारी,

(ठ) आबकारी चपरासी,

(ड) उ0प्र0 अग्निशमन सेवा के सदस्य,

(ढ) ऐसे अन्य समस्त सरकारी कर्मचारी जिनके कर्तव्यों में खतरनाक मशीनरी, विस्फोटक पदार्थ, जहरीली गैसों तथा औषधियों आदि से काम करना शामिल है अथवा जिन्हें खतरनाक काम करने पड़ते हों।

चिकित्सालय अवकाश उस प्राधिकारी जिसका कर्तव्य उस पद को (यदि वह रिक्त हो) भरने का होता है, के द्वारा निम्नलिखित शर्तों के अधीन स्वीकृत किया जा सकता है :—

(1) यह अवकाश उन्हीं सरकारी सेवकों को देय है जिनका वेतन रु0 1180 (दिनांक 01 जनवरी 1986 से लागू वेतनमानों में) प्रति मास से अधिक न हो।

(2) यह अवकाश चाहे एक बार में लिया जाये अथवा किश्तों में, किसी भी दशा में तीन वर्ष की कालावधि में छः माह से अधिक स्वीकृत नहीं किया जायेगा।

(3) यह प्रमाणित हो कि बीमारी या चोट सम्बन्धित कर्मचारी के अनियमित या असंयमित आदतों के परिणामस्वरूप नहीं है।

चिकित्सालय अवकाश को अवकाश लेखे से नहीं घटाया जाता है तथा इसे अन्य देय अवकाश से संयोजित किया जा सकता है, परन्तु शर्त यह है कि कुल मिलाकर अवकाश अवधि 28 माह से अधिक नहीं होगी।

सहायक नियम 156

अवकाश वेतन

चिकित्सालय अवकाश अवधि के पहले तीन माह तक के लिए वही अवकाश वेतन प्राप्त होता है जो वेतन अवकाश पर प्रस्थान करने के तुरन्त पूर्व प्राप्त हो रहा हो। तीन माह से अधिक की शेष अवधि के लिये अवकाश वेतन उक्त दर के आधे के हिसाब से दिया जाता है।

सहायक नियम 155 (3)

7–अध्ययन अवकाश

(मूल नियम 84 एवं सहायक नियम 146क)

जन स्वास्थ्य तथा चिकित्सा अनुसन्धान, कृषि, शिक्षा, पशुपालन, सार्वजनिक निर्माण तथा वन विभागों में कार्यरत स्थायी सरकारी सेवकों को जनहित में किन्हीं वैज्ञानिक, प्राविधिक अथवा इसी प्रकार की समस्याओं के अध्ययन या प्रशिक्षण के विशेष पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए निर्धारित शर्तों के अधीन अध्ययन अवकाश दिया जा सकता है। शासन जनहित में आवश्यक समझे तो इसे उक्त छः विभागों के अतिरिक्त अन्य विभागों के सरकारी कर्मचारियों पर भी लागू कर सकता है।

यह अवकाश भारत में अथवा भारत के बाहर अध्ययन करने के लिए स्वीकृत किया जा सकता है। जिन सरकारी सेवकों ने पाँच वर्ष से कम सेवा की हो अथवा जिन्हें सेवानिवृत्त होने का विकल्प तीन वर्ष या उससे कम में अनुमन्य हो, उनको अध्ययन अवकाश साधारणतया प्रदान नहीं किया जाता है।

असाधारण अवकाश या चिकित्सा प्रमाणपत्र पर अवकाश को छोड़कर अन्य प्रकार के अवकाश को अध्ययन अवकाश के साथ मिलाये जाने की दशा में सकल अवकाश अवधि के परिणामस्वरूप संबंधित सरकारी सेवक की अपनी नियमित ड्यूटी से अनुपस्थिति 28 महीनों से अधिक नहीं होनी चाहिए।

एक बार में बारह माह के अवकाश को साधारणतया उचित अधिकतम सीमा माना जाना चाहिए तथा केवल असाधारण कारणों को छोड़कर इससे अधिक अवकाश किसी एक समय में नहीं दिया जाना चाहिए।

सम्पूर्ण सेवा अवधि में कुल मिलाकर 2 वर्ष तक का अध्ययन अवकाश प्रदान किया जा सकता है।

अवकाश वेतन

अध्ययन अवकाश काल में अर्द्ध वेतन अनुमन्य होता है।

8–विशेष दिव्यांगता अवकाश (मूल नियम 83 तथा 83क)

राज्यपाल किसी ऐसे स्थायी अथवा अस्थायी सरकारी सेवक को जो किसी के द्वारा जानबूझकर चोट पहुँचाने के फलस्वरूप अथवा अपने सरकारी कर्तव्यों के उचित पालन में या उसके फलस्वरूप चोट लग जाने अथवा अपनी अधिकारीय स्थिति के परिणामस्वरूप चोट लग जाने के कारण अस्थायी रूप से दिव्यांग हो गया हो, को विशेष दिव्यांगता अवकाश प्रदान कर सकते हैं।

अवकाश तभी स्वीकृत किया जायेगा जबकि दिव्यांगता (disability) उक्त घटना के दिनांक से तीन माह के अन्दर प्रकट हो गई हो तथा संबंधित सेवक ने उसकी सूचना तत्परता से यथा सम्भव शीघ्र दे दी हो। राज्यपाल दिव्यांगता के बारे में संतुष्ट होने की दशा में घटना के तीन माह के पश्चात प्रकट हुई दिव्यांगता के लिए भी अवकाश प्रदान कर सकते हैं।

किसी एक घटना के लिए एक बार से अधिक बार भी अवकाश प्रदान किया जा सकता है। दिव्यांगता बढ़ जाये अथवा भविष्य में पुनः वैसी ही परिस्थितियाँ प्रकट हो जायें तो अवकाश ऐसे अवसरों पर एक से अधिक बार भी प्रदान किया जा सकता है।

अवकाश चिकित्सा परिषद द्वारा दिये गये चिकित्सा प्रमाणपत्र के आधार पर प्रदान किया जा सकता है तथा अवकाश की अवधि चिकित्सा परिषद द्वारा की गयी संस्तुति पर निर्भर रहती है, परन्तु यह चौबीस महीने से अधिक नहीं होगी। इसे किसी अन्य प्रकार के अवकाश के साथ संयोजित किया जा सकता है।

अवकाश वेतन

चार महीने पूर्ण वेतन तथा शेष अवधि में अर्द्ध वेतन।

9–लघुकृत अवकाश

मूल नियम 84 के अधीन उच्चतर वैज्ञानिक या प्राविधिक अर्हताएँ प्राप्त करने के लिए अध्ययन अवकाश पर जाने वाले स्थायी सरकारी सेवकों के विकल्प पर उन्हें एक बार में अनुमन्य निजी कार्य पर अवकाश की आधी अवधि तक का अवकाश लघुकृत अवकाश के रूप में स्वीकृत किया जा सकता है।

जितनी अवधि के लिए लघुकृत अवकाश स्वीकृत किया जायेगा, उसकी दुगुनी अवधि उसके निजी कार्य पर अवकाश खाते में जमा अवकाश में से घटा दी जायेगी।

यह अवकाश तभी स्वीकृत किया जायेगा जब स्वीकर्ता अधिकारी को यह समाधान हो जाये कि अवकाश समाप्ति पर सरकारी कर्मचारी सेवा में वापस आयेगा।

मूल नियम 81–ख (4)

अवकाश वेतन

अर्जित अवकाश की तरह अवकाश पर जाने से ठीक पहले प्राप्त वेतन, अवकाश वेतन के रूप में अनुमन्य है।

मूल नियम 87–क(4)

10–बाल्य देखभाल अवकाश

• महिला सरकारी सेवक को चाहे वह स्थायी हो अथवा अस्थायी, सम्पूर्ण सेवाकाल में अधिकतम 730 दिनों का बाल्य देखभाल अवकाश मातृत्व अवकाश की शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन अनुमन्य होगा।

• यह अवकाश विशिष्ट परिस्थितियों तथा संतान की बीमारी तथा परीक्षा आदि में देखभाल हेतु संतान की आयु 18 वर्ष होने की अवधि तक देय है।

• गोद ली गयी संतान के सम्बन्ध में भी यह अवकाश देय होगा। यह अवकाश दो सबसे बड़े जीवित बच्चों के लिए ही अनुमन्य होगा।

• सम्‍बन्धित महिला कर्मचारी के अवकाश लेखे में उपार्जित अवकाश देय होते हुए भी बाल्य देखभाल अवकाश अनुमन्य होगा।

• बाल्य देखभाल अवकाश को एक कैलेण्डर वर्ष के दौरान तीन बार से अधिक नहीं दिया जायेगा।

• बाल्य देखभाल अवकाश को 15 दिनों से कम के लिये नहीं दिया जायेगा।

• बाल्य देखभाल अवकाश को साधारणतया परिवीक्षा अवधि के दौरान नहीं दिया जायेगा। विशेष परिस्थितियों में यदि परिवीक्षाधीन महिला सरकारी सेवक को बाल्य देखभाल अवकाश स्वीकृत किये जाने की आवश्यकता पड़ती है तो यह सुनिश्चित किया जायेगा कि दिये जाने वाले अवकाश की अवधि कम-से-कम हो।

• बाल्य देखभाल अवकाश को अर्जित अवकाश के समान माना जायेगा और उसी प्रकार से स्वीकृत किया जायेगा।

• बाल्य देखभाल अवकाश के लेखे का रख-रखाव निम्नलिखित प्रारूप में किया जायेगा और इसको सम्बन्धित महिला सरकारी सेवक की सेवा पुस्तिका के साथ रखा जायेगा :—

Periods of Child Care Leave Taken Balance of Child Care Leave Signature and designation of the certifying officer
From To Balance Date  
(1) (2) (3) (4)  

(कार्यालय ज्ञाप संख्या–जी–2–2017/दस–2008–216–79, दिनांक 08–12–2008, कार्यालय ज्ञाप संख्या–जी–2–573/दस–2009–216–79, दिनांक 24–3–2009 तथा शासनादेश संख्या–जी–2–176/दस–2011–216–79 दिनांक 11 अप्रैल, 2011 तथा शासनादेश संख्या–3–जी–2–100/दस–2014–216–79 दिनांक 24 सितम्बर, 2014)

11–दत्तक ग्रहण अवकाश

• ऐसी महिला सरकारी सेवक जिनके दो से कम बच्चे जीवित हों एवं जिनके द्वारा एक वर्ष की आयु तक का बच्चा गोद लिया गया हो, को सामान्य माताओं को प्रदत्त मातृत्व अवकाश की भाँति 180 दिन के दत्तक ग्रहण अवकाश की सुविधा प्रदान की जायेगी। यदि किसी महिला सेवक के गोद लेने के समय दो या अधिक जीवित बच्चे हों तो यह अवकाश उसे स्वीकृत नहीं किया जायेगा।

• महिला सरकारी सेवक को उक्त अवकाश अवधि में वह पूर्ण वेतन देय होगा जो वह अवकाश पर जाने के दिनांक को आहरित कर रही हो।

• दत्तक ग्रहण अवकाश किसी अन्य प्रकार के अवकाश के साथ मिलाया जा सकता है तथा इसे किसी प्रकार के अवकाश लेखे से घटाया नहीं जायेगा।

• दत्तक ग्रहण अवकाश की निरन्तरता में महिला सेवकों द्वारा यदि आवेदन किया जाता है, तो कानूनी तौर पर गोद लिये जाने के दिनांक को बच्चे की आयु घटाते हुए अधिकतम एक वर्ष की अवधि तक का उसे देय एवं अनुमन्‍य अन्य अवकाश बिना दत्तक ग्रहण अवकाश की अवधि को जोड़े निम्न प्रतिबंधों के साथ स्वीकृत किया जा सकेगा—

1- दत्तक ग्रहण अवकाश पर बच्चे की आयु एक माह से कम होने पर एक वर्ष तक का अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।

2- बच्चे की आयु छः माह या अधिक परन्तु सात माह से कम होने पर छः माह तक का अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।

3- बच्चे की आयु नौ माह या अधिक परन्तु दस माह से कम होने पर तीन माह तक का अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।

(कार्यालय ज्ञाप संख्या–जी–2–2017/दस–2008–216–79, दिनांक 08–12–2008, कार्यालय ज्ञाप संख्या–जी–2–573/दस–2009–216–79, दिनांक 24–3–2009)

(II) मैनुअल आफ गवर्नमेंट आर्डर्स, उत्तर प्रदेश के अध्याय 142 तथा सहायक नियम 201 एवं 202 के अधीन अवकाश

आकस्मिक अवकाश, विशेष अवकाश तथा प्रतिकर अवकाश

वित्तीय नियम संग्रह खण्ड–दो (भाग 2 से 4) के सहायक नियम 201 के अनुसार आकस्मिक अवकाश को अवकाश की मान्यता नहीं है और न ही यह किसी नियम के अधीन है। आकस्मिक अवकाश पर सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से अनुपस्थित नहीं माना जाता और ड्यूटी वेतन देय होता है।

मैनुअल आफ गवर्नमेंट आर्डर्स, उत्तर प्रदेश के अध्याय 142 में आकस्मिक अवकाश, विशेष अवकाश और प्रतिकर अवकाश से संबंधित नियम दिये गये हैं।

प्रस्तर 1081 – आकस्मिक अवकाश के दौरान कार्य का उत्तरदायित्व

आकस्मिक अवकाश को मूल नियमों के अन्तर्गत मान्यता प्राप्त नहीं है इसलिए आकस्मिक अवकाश की अवधि में सरकारी सेवक सभी प्रयोजनों के लिए ड्यूटी पर माना जाता है।

आकस्मिक अवकाश के दौरान किसी प्रतिस्थानी की तैनाती नहीं की जायेगी।

यदि कार्यालय के कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान होता है तो आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने वाला अधिकारी तथा लेने वाला कर्मचारी इसके लिए उत्तरदायी होगा।

प्रस्तर 1082– आकस्मिक अवकाश की सीमा

(i) एक कैलेण्डर वर्ष में सामान्यतया 14 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जा सकता है।

(ii) एक समय में 10 दिन से अधिक का आकस्मिक अवकाश विशेष परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए।

(iii) आकस्मिक अवकाश के साथ रविवार एवं अन्य छुट्टियों को सम्बद्ध किये जाने की स्वीकृति दी जा सकती है।

(iv) रविवार, छुट्टियाँ एवं अन्य अकार्य दिवस (Non Working Day) यदि आकस्मिक अवकाश के बीच में पड़ते हैं तो उन्हें आकस्मिक अवकाश में नहीं जोड़ा जायेगा।

(v) विशेष परिस्थितियों में सामान्यतया अनुमन्य 14 दिन के आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त कुछ दिन का विशेष आकस्मिक अवकाश दिया जा सकता है परन्तु इस अधिकार का प्रयोग बहुत कम और केवल उसी दशा में किया जाना चाहिए जबकि ऐसा करने के लिए पर्याप्त औचित्य हो। लिपिक वर्गीय कार्मिकों के अतिरिक्त अन्य को दिए गए विशेष अवकाशों की सूचना सकारण प्रशासनिक विभाग को भेजनी होगी।

• शा0सं0 बी-820/दो-बी-ज 55, दिनांक 27-12-1955 तथा एफ0जी0ओ0 के पैरा 882 के अनुसार राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय खेलकूद में भाग लेने के लिए चयनित खिलाड़ियों को 30 दिन का विशेष आकस्मिक अवकाश दिया जा सकता है।

• मान्यता प्राप्त सेवा संघों/परिसंघों के अध्यक्ष एवं सचिव को संघ के कार्यों के निमित्त एक कैलेण्डर वर्ष में अधिकतम 07 दिन का तथा कार्यकारिणी के सदस्यों को कार्यकारिणी बैठक में भाग लेने हेतु अधिकतम 04 दिन का विशेष आकस्मिक अवकाश देय होगा। कार्यकारिणी के उन्हीं सदस्यों को यह सुविधा अनुमन्य होगी जो कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने हेतु बैठक के स्थान से बाहर से आयें।

(शा0सं0-1694/का-1/83 दिनांक 5-7-83 तथा 1847/का-4-ई-एक-81-83, दिनांक 4-10-83)

प्रस्तर 1083 – आकस्मिक अवकाश पर मुख्यालय छोड़ने की पूर्व अनुमति

आकस्मिक अवकाश लेकर मुख्यालय छोड़ने की दशा में सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। अवकाश अवधि में पता भी सूचित किया जाना चाहिए।

प्रस्तर 1084 – समुचित कारण

आकस्मिक अवकाश समुचित कारण के आधार पर ही स्वीकृत किया जाना चाहिए।
सरकारी दौरे पर रहने की दशा में आकस्मिक अवकाश लेने पर उस दिन का दैनिक भत्ता अनुमन्य नहीं है।

प्रस्तर 1085 – सक्षम अधिकारी

आकस्मिक अवकाश केवल उन्हीं अधिकारियों द्वारा स्वीकृत किया जा सकता है जिन्हें शासनादेशों के द्वारा समय-समय पर अधिकृत किया गया है। किसी भी प्रकार का संशय होने पर अपने प्रशासनिक विभाग को सन्दर्भ भेजा जाना चाहिए।

प्रस्तर 1086 – आकस्मिक अवकाश रजिस्टर

आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम अधिकारी द्वारा आकस्मिक अवकाश तथा निर्बन्धित अवकाश का लेखा निम्न प्रारूप पर अनिवार्य रूप से रखा जायेगा। इस रजिस्टर का परीक्षण निरीक्षणकर्ता अधिकारियों द्वारा समय-समय पर किया जायेगा—

कर्मचारी का नाम/पदनाम स्वीकृत किया गया आकस्मिक अवकाश निर्बन्धित अवकाश
14    13    12     11 …………… 2    1

प्रस्तर 1087 – विशेष आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति

निम्नलिखित मामलों में सरकारी सेवकों को विशेष आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किये जाने की व्यवस्था की गयी है—

  1. विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य — यात्रा समय सहित बैठक की अवधि तक के लिये।
  2. परिवार नियोजन—नसबन्दी (पुरुष) — 6 कार्य दिवस।
  3. नसबन्दी (महिला) — 14 कार्य दिवस।
  4. वैज्ञानिकों, अधिकारियों को किसी वर्कशाप/सेमिनार में शोध पत्र पढ़ने हेतु — यात्रा समय सहित वर्कशाप की अवधि।

प्रस्तर 1088 – भारतवर्ष से बाहर जाने के लिए अवकाश

भारतवर्ष से बाहर जाने के लिये आवेदित किये गये अवकाश (आकस्मिक अवकाश सहित) की स्वीकृति सक्षम अधिकारी द्वारा शासन की पूर्वानुमति के बिना नहीं दी जायेगी।

प्रस्तर 1089 – प्रतिकर अवकाश

  • अराजपत्रित कर्मचारी को उच्चतर प्राधिकारी के आदेशों के अधीन छुट्टियों में अतिरिक्त कार्य को निपटाने के लिए बुलाये जाने पर प्रतिकर अवकाश दिया जायेगा।

  • यदि कर्मचारी ने आधे दिन काम किया है तो उसे दो आधे दिन मिलाकर एक प्रतिकर अवकाश दिया जायेगा।

  • अवकाश के दिन स्वेच्छा से आने वाले कर्मचारी को यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
  • प्रतिकर अवकाश का देय तिथि से एक माह के अन्दर उपभोग कर लिया जाना चाहिये। यदि ज्यादा कर्मचारियों को प्रतिकर अवकाश दिया जाना है तो सरकारी कार्य में बाधा न पड़ने की दृष्टि से एक महीने की शर्त को शिथिल किया जा सकता है।
  • दो दिन से अधिक प्रतिकर अवकाश एक साथ नहीं दिया जायेगा।
  • आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने वाला अधिकारी प्रतिकर अवकाश की स्वीकृति के लिए सक्षम है।

संगरोध (Quarantine) हेतु अवकाश (सहायक नियम 202)

  • सरकारी सेवक के स्वयं बीमार होने पर उसे चिकित्सा प्रमाण पत्र पर अवकाश सहित अन्य अवकाश की सुविधा उपलब्ध है लेकिन सरकारी सेवक के परिवार या घर में संक्रामक रोग हो जाने पर सरकारी सेवक संक्रमण का वाहक बनकर उसे कार्यालय में न फैला दे, इस उद्देश्य से सम्बन्धित कर्मचारी को कार्यालय आने से मना किये जाने की आवश्यकता पड़ती है। उक्तानुसार सरकारी सेवक को कार्यालय में उपस्थित होने से मना किये जाने पर उसे पूर्व में वर्णित आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त विशेष आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जाता है जिसे सामान्यतया संगरोध अवकाश कहा जाता है।
  • इसे कार्यालयाध्यक्ष द्वारा चिकित्सा अथवा जन स्वास्थ्य अधिकारी के प्रमाण-पत्र के आधार पर स्वीकृत किया जा सकता है।
  • इसे 21 दिन से अनधिक अवधि के लिए अथवा आपवादिक परिस्थितियों में 30 दिन तक की अवधि के लिए स्वीकृत किया जा सकता है।
  • संगरोध के प्रयोजन से उपर्युक्त अवधि से अधिक अवकाश की आवश्यकता होने पर उसे सामान्य अवकाश माना जायेगा।
  • सामान्यतः आकस्मिक अवकाश को सामान्य अवकाशों के साथ संयोजित नहीं किया जा सकता है लेकिन संगरोध के प्रयोजन से स्वीकृत किये जाने वाले आकस्मिक अवकाश को सामान्य अवकाशों के साथ संयोजित किया जा सकता है।
  • सहायक नियम 202 की टिप्पणी-1 के अन्तर्गत एक तालिका दी गयी है जिसमें सरकारी कर्मचारी के परिवार अथवा घर में संक्रामक रोग होने के कारण उसे जिस अवधि के लिए कार्यालय आने से मना किया जा सकता है, उसका उल्लेख है। उक्त तालिका में आठ संक्रामक रोगों हेतु दोनों स्थितियों में अर्थात् रोगी को अस्पताल में भर्ती किये जाने आदि के दृष्टिगत जब संक्रमण का स्रोत समाप्त हो जाता है तथा रोगी का उपचार घर पर ही किये जाने पर जब कर्मचारी को लगातार संक्रमण का खतरा रहता है, सरकारी कर्मचारी को कार्यालय आने से मना किये जाने की अवधि दी गयी है।

उक्त तालिका में उल्लिखित संक्रामक रोग निम्नवत हैं—

  1. चेचक
  2. स्कारलेट ज्वर
  3. हैजा
  4. सेरोवोस्‍पाइनल मिनिनजाइटिस
  5. डिफ्थीरिया
  6. इन्टेरिक ज्वर
  7. प्लेग
  8. टाइफस

(III) सेवानिवृत्ति आदि पर अर्जित अवकाश का नकदीकरण

सरकारी सेवकों के सेवानिवृत्त होने पर उनके अवकाश लेखे में जमा अर्जित अवकाश के लिए नियमानुसार ग्राह्य अवकाश वेतन के समतुल्य नकद धनराशि के भुगतान अर्थात् अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा सर्वप्रथम शासनादेश संख्या जी-4-1002/दस-200-77 दिनांक 26 अप्रैल, 1978 (दिनांक 30 सितम्बर, 1977 से प्रभावी) द्वारा प्रारम्भ की गयी। यह सुविधा दिनांक 30 सितम्बर 1977 या उसके पश्चात केवल अधिवर्षता पर सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी सेवकों पर लागू थी। उक्त शासनादेश दिनांक 26 अप्रैल, 1978 में देय अवकाश नकदीकरण की धनराशि में से पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्तिक लाभों के ऐरियरों की कटौती की भी व्यवस्था थी जिसे शासनादेश संख्या: सामान्य-4-1939/दस-200-77, दिनांक 10 जनवरी 1979 (30-09-1977 से प्रभावी) द्वारा समाप्त कर दिया गया। बाद में शासनादेश संख्या: सा-4-1327/दस-200/77, दिनांक 10 जनवरी, 1979 (दिनांक 01 अप्रैल 1979 से प्रभावी) द्वारा इस सुविधा हेतु सरकारी सेवकों के सेवारत रहते हुए मृत्यु सम्बन्धी प्रकरणों को भी सम्मिलित किया गया। पुनः शासनादेश संख्या: सा-4-1687/दस-83-200-77टी0सी0 दिनांक 25 जुलाई, 1983 द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, अशक्तता पर सेवानिवृत्ति, निलम्बनाधीन रहते हुए सेवानिवृत्ति, आदि मामलों में अवकाश नकदीकरण की सुविधा कतिपय शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन उपलब्ध करायी गयी। प्रारम्भ में अवकाश नकदीकरण की सुविधा अधिकतम 180 दिनों (अर्जित अवकाश जमा होने की अधिकतम सीमा) के लिए ग्राह्य थी, जिसे 01 जनवरी 1980 से बढ़ाकर 240 कर दिया गया। वर्तमान में सेवानिवृत्ति की स्थिति में 300 दिनों (दिनांक 01 जुलाई 1999 से प्रभावी) के अर्जित अवकाश का नकदीकरण अनुमन्य है। ऊपर सन्दर्भित शासनादेश तथा इस सम्बन्ध में बाद में निर्गत शासनादेशों द्वारा अर्जित अवकाश के नकदीकरण के सम्बन्ध में किये गये प्रावधानों का संक्षिप्त विवरण अधोलिखित है:—

पात्रता:—

अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा निम्नलिखित स्थितियों में अनुमन्य है:—

(क) अधिवर्षता पर सेवानिवृत्त होने पर।

(ख) स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर।

(ग) अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर।

(घ) सेवारत रहते हुए मृत्यु होने पर मृत सरकारी सेवक के परिवार को।

(ङ) सरकारी सेवक की सेवा नोटिस अथवा नोटिस के बदले वेतन और भत्ते देकर अथवा उसकी नियुक्ति के निबन्धनों एवं शर्तों के अनुसार अन्यथा समाप्त कर दिये जाने पर।

(च) सरकारी सेवक को चिकित्सा अधिकारी द्वारा आगे सेवा करने के लिए पूर्णतया और स्थायी रूप से असमर्थ घोषित कर दिये जाने पर—इस प्रकार के मामलों में अवकाश नकदीकरण की सुविधा अस्थायी सरकारी सेवकों को अनुमन्य नहीं है।

(छ) सेवानिवृत्ति के पश्चात पुनर्योजित किये जाने पर—पुनर्योजन के मामलों में पुनर्योजन की समाप्ति के दिनांक को देय अवकाश के नकदीकरण सुविधा इस प्रतिबन्ध के साथ अनुमन्य है कि सेवानिवृत्ति के समय नकदीकरण हेतु अभ्यर्पित अवकाश की संख्या तथा पुनर्योजन की समाप्ति पर नकदीकरण हेतु अभ्यर्पित किये जाने वाले अवकाश की संख्या का योग अवकाश नकदीकरण हेतु अनुमन्य अधिकतम सीमा (01 जुलाई 1999 से 300 दिन) से अधिक न हो।

(ज) सेवा से त्यागपत्र देने पर—सरकारी सेवक के सेवा से त्याग पत्र देने पर उसकी सेवा समाप्ति के दिनांक को उसके अवकाश लेखे में जमा कुल अर्जित अवकाश की आधी सीमा तक अर्जित अवकाश का नकदीकरण अनुमन्य है।

(झ) निलम्बनाधीन रहते हुए सेवानिवृत्त होने पर:— पूर्व में सन्दर्भित शासनादेश दिनांक 25 जुलाई 1983 में दी गयी व्यवस्थानुसार सरकारी सेवा में निलम्बनाधीन रहते हुए अधिवर्षता आयु प्राप्त कर सेवानिवृत्त होने पर अवकाश नकदीकरण उसके विरुद्ध प्रचलित कार्यवाही की समाप्ति पर इस प्रतिबन्ध के साथ अनुमन्य था कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसके निलम्‍बन को पूर्णतया अनुचित माना गया हो। शासनादेश संख्या: 6/2016/जी-22-143/दस-2016-200-77टी0सी0 दिनांक 19 अगस्त, 2016 द्वारा तत्‍काल प्रभाव से उक्‍त व्‍यवस्‍था को प्रतिस्‍थापित करते हुए प्रावधान किया गया है कि सरकारी सेवक के निलम्बनाधीन रहते हुए अथवा किसी अनुशासनिक या दाण्डिक कार्यवाही लम्बित रहते हुए सेवानिवृत्त हो जाने पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा सम्बन्धित को अनुमन्य अवकाश नकदीकरण की धनराशि पूर्णतः या आंशिक रूप से रोकी जा सकती है, यदि उनकी दृष्टि में ऐसे सरकारी सेवक के विरुद्ध कोई धनराशि वसूलनीय होनी की सम्भावना हो। उक्त कार्यवाहियों की समाप्ति पर रोकी गयी धनराशि में से सरकारी देय धनराशि (यदि कोई हो) के समायोजनोपरान्त शेष धनराशि का भुगतान सम्बन्धित को कर दिया जायेगा।

स्वीकर्ता प्राधिकारी:—

शासनादेश संख्या- जी-4-1002/दस-200-77 दिनांक 26 अप्रैल, 1978, जिसके द्वारा सेवानिवृत्ति पर अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा प्रारम्भ की गयी थी, के अनुसार अवकाश स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकारी को अवकाश नकदीकरण की स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकारी माना गया था। राजपत्रित अधिकारियों को सेवानिवृत्ति आदि पर अनुमन्य अवकाश नकदीकरण की स्वीकृति में होने वाले विलम्ब को समाप्त करने के उद्देश्य से शासनादेश संख्या: सा-4-1130/दस-91-200-77 दिनांक 07 जनवरी, 1992 द्वारा राजपत्रित अधिकारियों के सेवानिवृत्ति आदि पर अर्जित अवकाश के नकदीकरण स्वीकृत करने का अधिकार विभागाध्यक्षों को प्रतिनिधानित किया गया। पुनः शासनादेश संख्या: सा-4-438/दस-2000-203-86 दिनांक 03 जुलाई 2000 (दिनांक 01 जुलाई 1999 से प्रभावी) द्वारा राज्य सरकार के सेवकों को उनके सेवानिवृत्ति आदि पर अवकाश लेखें में जमा अर्जित अवकाश के नकदीकरण का अधिकार विभागाध्यक्षों को प्रदान किया गया है।

अवकाश नकदीकरण का आगणन:—

अवकाश नकदीकरण की सुविधा हेतु सेवानिवृत्ति आदि के दिनांक को अनुमन्य मूल वेतन (मूल नियम 9(21)(i) में परिभाषित वेतन) तथा उस पर प्राप्त होने वाले महंगाई भत्ते की धनराशि को ही गणना में लिया जायेगा। इसके अतिरिक्त कोई अन्य भत्ता (मकान किराया भत्ता आदि) देय नहीं होगा।

अवकाश नकदीकरण की गणना निम्न प्रकार से की जायेगी:—

अवकाश नकदीकरण की धनराशि =सेवानिवृत्ति के दिनांक को देय वेतन एवं महंगाई भत्ता×300 दिन की अधिकतम सीमा के अधीन सेवानिवृत्ति के दिनांक को सम्बन्धित सरकारी सेवक के अवकाश खाते में जमा अवशेष उपार्जित अवकाश के दिनों की संख्या÷ 30

सेवारत रहते हुए मृत्यु हो जाने पर अवकाश नकदीकरण का भुगतान:—

सेवारत रहते हुए मृत्यु होने पर मृत सरकारी सेवक के आश्रित पात्रों को अवकाश नकदीकरण की धनराशि के भुगतान के सम्बन्ध में शासनादेश संख्या- 6/2021/जी-2-151/दस-2021-200/88 दिनांक 14 सितम्बर, 2021 द्वारा निम्नवत वरीयता निर्धारित की गयी है:—

(i) यदि मृत सरकारी सेवक पुरुष था तो विधवा को और यदि स्त्री थी तो पति को। विधवा को भुगतान होने की दशा में यदि एक से अधिक विधवायें हों तो सबसे बड़ी जीवित विधवा अर्थात जिसका विवाह पहले हुआ हो, को;

(ii) विधवा या पति, जैसा भी मामला हो, के न होने पर सबसे बड़े जीवित पुत्र को या एक दत्तक पुत्र को;

(iii) उपर्युक्त (i) और (ii) के न होने पर सबसे बड़ी जीवित अविवाहित पुत्री को;

(iv) उपर्युक्त (i) से (iii) के न होने पर सबसे बड़ी जीवित विधवा पुत्री को;

(v) उपर्युक्त (i) से (iv) के न होने पर पिता को;

(vi) उपर्युक्त (i) से (v) के न होने पर माता को;

(vii) उपर्युक्त (i) से (vi) के न होने पर सबसे बड़ी जीवित विवाहित पुत्री को;

(viii) उपर्युक्त (i) से (vii) के न होने पर अट्ठारह वर्ष से कम आयु के सबसे बड़े जीवित भाई को;

(ix) उपर्युक्त (i) से (viii) के न होने पर सबसे बड़ी जीवित अविवाहित बहन को;

(x) उपर्युक्त (i) से (ix) के न होने पर सबसे बड़ी जीवित विधवा बहन को; और

(xi) उपर्युक्त (i) से (x) के न होने पर मृत ज्येष्ठ पुत्र के सबसे बड़े बच्चे को।

भुगतान का लेखा शीर्ष:

वर्तमान में अवकाश नकदीकरण की धनराशि का भुगतान अनुदान संख्या–62 वित्त विभाग (अधिवर्ष भत्ते तथा पेंशन) से किया जा रहा है। राज्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति आदि पर देय अवकाश नकदीकरण का लेखा शीर्ष निम्नलिखित है :–

(क) दिनांक 08 नवम्बर, 2000 तक सेवा से विरत हुए कर्मचारियों का अवकाश नकदीकरण

2071–पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति हित लाभ
01– सिविल
115–छुट्टी नकदीकरण हित लाभ
03– सेवानिवृत्ति के समय अवकाश का नकदीकरण
0301– दिनांक 08 नवम्बर, 2000 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अवकाश का नकदीकरण
33– पेंशन / आनुतोषिक / अन्य सेवानिवृत्ति हित लाभ

(ख) दिनांक 08 नवम्बर, 2000 के पश्चात सेवा से विरत हुए कर्मचारियों का अवकाश नकदीकरण

2071–पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति हित लाभ
01– सिविल
115–छुट्टी नकदीकरण हित लाभ
03– सेवानिवृत्ति के समय अवकाश का नकदीकरण
0302– दिनांक 08 नवम्बर 2000 के पश्चात सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अवकाश का नकदीकरण
33– पेंशन / आनुतोषिक / अन्य सेवानिवृत्ति हित लाभ

नोट :– अवकाश नियमों सम्बन्धी विस्तृत जानकारी हेतु मूल (Original) संदर्भित नियमों एवं शासनादेशों का अध्ययन करना चाहिये।