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उत्तर प्रदेश यवासवनी नियमावली, 1961 (सप्तम संशोधन-2021 तक संशोधित)

नियम-1-संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ

(एक) यह नियमावली उत्तर प्रदेश यवासवनी नियमावली, 1961 कही जायेगी।

(दो) यह गजट में प्रकाशित किये जाने के दिनांक से प्रवृत्त होगी।

नियम-2-परिभाषाएं

(1) जब तक विषय या सन्दर्भ में कोई बात प्रतिकूल न हो, इस नियमावली में: –

(एक) “अधिनियम” का तात्पर्य संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम, 1910 (संयुक्त प्रान्त अधिनियम संख्या 4 सन् 1910) से है।

(दो) “बार” का तात्पर्य अधिनियम के अधीन किसी अधिष्ठान हेतु स्वीकृत ऐसे विशेषाधिकार से है जिसके द्वारा विदेशी मदिरा और भारत निर्मित विदेशी मदिरा की खुली मात्रा में लाइसेंस प्राप्त परिसर में उपभोग हेतु फुटकर बिक्री की जाती है।

(तीन) “बीयर” में एल स्टाउट, पोर्ट तथा माल्ट से बनी अन्य समस्त किण्वित शराब सम्मिलित है।

(चार) “ब्रुअर (यवासवक)” का तात्पर्य यवासवनी (ब्रुवरी) चलाने के लिये प्रपत्र बी -1 में लाइसेन्स धारक व्यक्ति से है।

(पांच) “ब्रुअरी (यवासवनी)” का तात्पर्य ऐसे भवन से है जहाँ बीयर बनाई जाती है और इसमें ऐसा प्रत्येक स्थान, जहाँ बीयर संग्रहीत की जाती है या जहां से बीयर की निकासी की जाती है, भी सम्मिलित है।

(छः) “कौपर (देगची)” का तात्पर्य ऐसे पात्र से है जिसमें बीयर बनाने के दौरान वार्ट्स या जल उबाला जाता है या गरम किया जाता है।

सात) “ड्राट बीयर” का तात्पर्य पाश्चुराइजीकरण से पूर्व वैट / बैरल / कास्क या किसी अन्य पात्र से प्राप्त बल्क बीयर (फिल्टर किया हुआ, कार्बनाइज किया हुआ तथा सेवा के लिये तैयार) से है।

(आठ) “आबकारी वर्ष” का तात्पर्य 01 अप्रैल से प्रारम्भ होकर आगामी 31 मार्च को समाप्त होने वाली अवधि से है।

(नौ) “किण्वन पात्र” का तात्पर्य ऐसे पात्र से है जिसमें वार्ट्स का यीस्ट की प्रक्रिया से किण्वन किया जाता है।

(दस) “प्रपत्र” का तात्पर्य इस नियमावली के साथ संलग्न प्रपत्र से है।

(ग्यारह) “घनत्व” का तात्पर्य उस अनुपात से है जिसे द्रव का भार आसवित जल के बराबर मात्रा में धारित करता है, 60 फा0 के आसवित जल का घनत्व 1000 होना माना जायेगा।

(बारह) “हौप्स” का तात्पर्य हौप पौधे के पके हुए मादा पुष्पों या उनके किसी भाग से है, जो बीयर बनाने में बीयर को तीखा स्वाद देने और उसे संरक्षित रखने तथा साफ करने में प्रयुक्त होते हैं।

(तेरह) “हौप बैक” का तात्पर्य ऐसे पात्र से है जिसमें प्रयुक्त हाप्स को हटाने के लिए उबालने के बाद वार्ट्स को ले जाया जाता है।

(चौदह) “लाइसेंस” का तात्पर्य इस नियमावली के अधीन स्वीकृत लाइसेंस से है।

(पन्द्रह) “लाइसेंस फीस” का तात्पर्य उस वार्षिक लाइसेंस फीस से है जिसे समय-समय पर राज्य सरकार के पूर्व परामर्श से आबकारी आयुक्त द्वारा निर्धारित किया जाये।

(सोलह ) “माल्ट” का तात्पर्य यवासवन (ब्रुइंग) के लिये प्रयुक्त मूल अंकुरित उन दानों से है जो दीर्घकालीन किण्वन या अन्न के दानों को भिगाने या दबाने की प्रक्रिया के अधीन करने के परिणामस्वरूप प्राप्त होते हैं।

(सत्रह) “माल्ट अनुकल्प” का तात्पर्य किण्वन के प्रयोजनों के लिए माल्ट के अनुकल्प (सब्सट्यूट) के रूप में प्रयुक्त किये जाने के लिए समुचित अनुपात में मिलायी गयी चीनी या स्टार्च से है।

(अठारह) “मश्टन” का तात्पर्य ऐसे पात्र से है जिसमें ब्रुइंग के दौरान माल्ट या अन्न के दाने का किण्वन योग्य अन्तर्वस्तु निष्कर्षित होता है।

(उन्नीस) “लघुयवासवक” का तात्पर्य लघु यवासवनी चलाने के लिए प्रपत्र एम0बी0-1 में लाइसेंस धारक व्यक्ति से है।

(बीस) लघु यवासवनी का तात्पर्य ऐसी किसी छोटी यवासवनी से है जिसकी अधिष्ठापित क्षमता छः सौ बल्क लीटर प्रति दिन से अधिक न हो तथा जो होटल, रिसार्ट, रेस्टोरेन्ट एवं वाणिज्यिक क्लब बार हेतु जारी किये गये बार लाइसेंस के परिसर में स्थित हो, जहाँ परिसर के भीतर ग्राहकों के उपभोग हेतु ड्राट बीयर का उत्पादन किया जाता है और उसे परोसा जाता है।

(इक्कीस) “प्रभारी अधिकारी का तात्पर्य आबकारी निरीक्षक या (यवासवनी) का भार संभालने के लिए आबकारी आयुक्त द्वारा नियुक्त किये गये अधिकारी से है जो आबकारी निरीक्षक की श्रेणी से नीचे का न हो।

(बाईस) ‘रैकिंग या सैटलिंग बैक” का तात्पर्य ऐसे पात्र से है जिसमें वार्ट्स, किण्वन पात्र से अन्तरित किये जाते हैं और या तो तत्काल या कुछ समय बाद संचय टंकी (वाट) या पीपे में डाले (रैक किये) जाते हैं।

(तेईस) अन्डर बैक” का तात्पर्य ऐसे पात्र से है ‘ जिसमें वार्ट या तो मश्टन से या हाप बैंक से अन्तरित किये जाते हैं।

(चौबीस) “वार्ट’ का तात्पर्य यवासवन (ब्रुइंग) की प्रक्रिया के दौरान माल्ट या अन्न के दानों के निःशेष करने या सेक्रीन पदार्थ के घोल से प्राप्त शराब से है।

(2) इस नियमावली मे अपरिभाषित किन्तु अधिनियम में परिभाषित शब्दों और पदों के वही अर्थ होंगे, जो अधिनियम में उनके लिए क्रमशः समनुदेशित हैं।

क-यवासवनियों की स्‍थापना

नियम-3

(1) कोई व्यक्ति जो उत्तर प्रदेश राज्य में यवासवनी स्थापित करने के लिये लाइसेन्स प्राप्त करने का इच्छुक हो, वह उस जिले के जहां यवासवनी स्थापित करने का प्रस्ताव हो, कलेक्टर के माध्यम से आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश को लाइसेन्स के लिये आवेदन-पत्र देगा। आवेदन-पत्र प्रपत्र ख-19 में होगा।

(2) उसका आवेदन-पत्र ग्रहण कर लिए जाने पर आवेदक उस भू-गृहादि तथा पात्रों का प्लान तथा सम्पूर्ण विवरण (जिसे एतद्पश्चात् एन्ट्री कहा जायगा) प्रस्तुत करेगा जिसमें प्रत्येक कक्ष तथा पात्र का प्रयोजन और कक्ष तथा पात्र का विशिष्ट चिन्ह उल्लिखित होगा। प्लान ट्रेसिंग कपड़े पर माप के अनुसार होगा जिसमें प्रयोग के लिये प्रस्तावित प्रत्येक कक्ष तथा पात्र की वास्तविक स्थिति तथा लम्बाई चौड़ाई दर्शाये जायेंगे।

(3) यदि आबकारी आयुक्त का ऐसी जॉच के पश्चात् जिसे वह आवश्यक समझें, समाधान हो जाये तो वह ऐसी शर्तों के अध्यधीन जिसे राज्य सरकार अधिरोपित करना आवश्यक समझें, यवासवनी की स्थापना को प्राधिकृत करेगा और प्रपत्र -ख – 20 में लाइसेन्स जारी करेगा। ऐसा लाइसेंस स्वीकृत किये जाने के लिए फीस रूपया 2,50,000 ( मात्र दो लाख पचास हजार रूपये) होगी जो उस वर्ष या उसके भाग के लिए जिसके निमित्त लाइसेन्स दिया जाय, अग्रिम रूप से संदेय होगी।

टिप्पणी – प्रदेश की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आबकारी आयुक्त को यह शक्ति होगी कि वह लाइसेन्स के लिये दिये गये किसी आवेदन-पत्र को स्वीकार या अस्वीकार करें।

(4) उपर्युक्त लाइसेन्स जारी किये जाने के दिनांक से केवल एक वर्ष के लिये विधिमान्य होगा, जब तक कि अवधि विशिष्टतया न बढ़ाई जाय और विधिमान्यता की ऐसी अवधि में लाइसेन्सधारी यवासवनी की स्थापना हेतु भूमि, भवन, संयन्त्र, मशीनरी तथा अन्य उपस्कर प्राप्त करने की व्यवस्था करेगा। इससे बीयर के निर्माण के लिये लाइसेन्स दिये जाने के निमित्त कोई अधिकार अथवा विशेषाधिकार प्राप्त न होगा और इसे, किसी भी समय, लोक-हित में लाइसेन्सधारी का लाइसेन्स विखंडित करने या उसे वापस लेने की कार्यवाही किये जाने के विरुद्ध कारण बताने का नोटिस देने और उसकी सुनवाई, यदि कोई हो, करने के पश्चात विखंडित किया अथवा वापस लिया जा सकेगा। जब लाइसेंस इस प्रकार विखंडित किया जाय या वापस लिया जाय तो क्षति या हानि के लिये कोई प्रतिकर देय न होगा।

नियम-4

(1) सिवाय आबकारी आयुक्त द्वारा प्रपत्र ख-1 में दिये गये लाइसेन्स के प्राधिकार और उसके निबन्धनों तथा शर्तों के अधीन रहते हुए न तो किसी बीयर का निर्माण किया जायगा और कोई व्यक्ति बीयर का निर्माण करने के प्रयोजनार्थ ऐसे किसी सामान, बर्तन, औजार तथा उपकरण आदि का, जो भी हो, न तो प्रयोग करेगा, न उसको अपने पास और न अपने कब्जे में रखेगा।

(2) उपर्युक्त लाइसेंस दिये जाने के लिये आवेदन-पत्र प्रपत्र ख-21 में होगा और जो आबकारी-आयुक्त को प्रपत्र ख-20 में लाइसेन्स दिये जाने के दिनांक से एक वर्ष के भीतर प्रस्तुत किया जायगा जब तक कि विनिर्दिष्ट अन्यथा अनुमति न दी गई हो।

(3) प्रपत्र ख-1 में लाइसेंस दिये जाने के पूर्व आबकारी आयुक्त द्वारा प्राधिकृत आबकारी अधिकारी भू गृहादि आदि का निरीक्षण करेगा तथा उपर्युक्त प्लान और एन्ट्रीज से उसका मिलान करेगा तथा तदनुसार प्रमाण-पत्र देगा।

नियम-5

प्रपत्र ख-1 में कोई लाइसेंस तब तक नहीं दिया जायेगा जब तक कि आवेदक ने-

(क) आबकारी आयुक्त का यह समाधान न कर दिया हो कि संयंत्र से प्रति दिन कम से कम 2500 लीटर बीयर का उत्पादन किया जा सकता है,

(ख) आबकारी आयुक्त का यह समाधान न कर दिया हो कि बीयर बनाने, उसका संग्रह तथा उसकी निकासी करने के सम्बन्ध में प्रयुक्त किया जाने वाला प्रस्तावित भवन, पात्र, संयंत्र तथा उपकरण तदर्थ नियमों के अनुसार बनाये गये हैं और आग से बचने के लिए सम्यक् उपाय किये गये हैं।

(ग) अपने लाइसेंस की सभी शर्तों को पूरा करने के लिये और ऐसी सभी धनराशियों का भुगतान करने के लिये जो उसके लाइसेंस के उपबन्धों के अधीन उपशुल्क, शास्ति, अर्थ-दण्ड तथा कर के रूप में सरकार को देय हो जाय अथवा जिसके लिये यवासवनी विधि द्वारा अथवा नियमों द्वारा, जिसमें विधि का बल हो, या किसी वचन बन्ध या बन्ध पत्र के अधीन जो उसने किया हो, देनदार हो, प्रतिभूति के रूप में आबकारी आयुक्त द्वारा राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के समय-समय पर निर्धारित धनराशि जमा की गई हो।

यवासवक को उन पर प्रोद्भूत होने वाला ब्याज, जैसे ही वह देय हो, लेने की अनुज्ञा दी जायगी ।

(घ) नियम 7 (1) के अधीन विहित लाइसेंस फीस अग्रिम रूप से जमा कर दी है और वर्ष या उसके भाग के लिये लाइसेंस दिये जाने के निमित्त लाइसेंस प्राधिकारी को फीस जमा करने का प्रमाण प्रस्तुत कर दिया है।

नियम-6-लाइसेन्स को अस्वीकार या प्रदान करने की शक्ति

(1) उपनियम (2) के प्राविधानों के अधीन, आबकारी आयुक्त की राज्य की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस के लिए या लाइसेंस के नवीकरण के लिए किसी आवेदन पत्र को स्वीकार करने या अस्वीकार करने की शक्ति होगी।

(2) लाइसेंस को प्रदान करने या नवीकरण करने से इनकार करने के आबकारी आयुक्त के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति आदेश के तीस दिनों के भीतर राज्य सरकार को पुनरीक्षण के लिए आवेदन कर सकेगा और सरकार मामले में ऐसा आदेश कर सकती है, जिसे वह उचित समझे।

नियम-7-लाइसेंस / नवीकरण फ़ीस

(1)– प्रपत्र बी -1 में लाइसेन्स दिये जाने या उसका नवीनीकरण किये जाने के लिए फीस निम्नवत होगी, –

(एक) ऐसी यवासवनी के लिए जिसमें वार्षिक अधिष्ठापित क्षमता 5,000 किलोलीटर तक हो- रुपये 1,50,000 (मात्र एक लाख पचास हजार रूपये)।

(दो) ऐसी यवासवनियों के लिए, जिनकी वार्षिक अधिष्ठापित क्षमता 5,000 किलोलीटर से अधिक और 10,000 किलोलीटर तक हो रुपये 3,00,000 ( मात्र तीन लाख रूपये)

(तीन) ऐसी यवासवनियों के लिए, जिनकी वार्षिक अधिष्ठापित क्षमता 10,000 किलोलीटर से अधिक हो, फीस रुपये 30 (तीस रूपये मात्र) प्रति किलोलीटर संदेय होगी।

(2) विदेशी शराब को बोतल में भरने के लिये लाइसेन्स प्राप्त किये बिना कोई यवासवक अपनी यवासवनी में उत्पादित बीयर को बोतल में नहीं भरेगा।

नियम-8-प्रतिभूति जमा का समपहरण तथा उससे कटौती

सहायक आबकारी आयुक्त से अनिम्न श्रेणी के आबकारी विभाग के अधिकारी के समक्ष तत्समय प्रवृत्त आबकारी विधि के उल्लंघन के सिद्ध होने की दशा में, प्रतिभूति जमा की संपूर्ण या आंशिक धनराशि, जैसा राज्य नियत करे तथा उसके साथ यवासवनी का लाइसेंस समपहरण किये जायँगे। आबकारी आयुक्त उनमें से शुल्क, लाइसेंस फीस, शास्ति या जुर्माने के रूप में राज्य सरकार को देय समस्त रकमों की कटौती का भी आदेश दे सकती है।

नियम-9-लाइसेन्स का नवीकरण

आगामी तीन आबकारी वर्ष तक के लिये लाइसेंस के नवीकरण का आवेदन पत्र कलेक्टर के माध्यम से आबकारी आयुक्त को प्रपत्र बी-2 में वर्ष की 28 फरवरी या उसके पूर्व प्रस्तुत किया जायेगा। यदि प्लांट या भवन में परिवर्तन किया गया हो तो नया प्लान प्रस्तुत किया जायेगा। यदि कोई परिवर्तन नहीं किया गया हो तो इस आशय का प्रमाण पत्र प्रभारी अधिकारी से प्राप्त कर लाइसेंस के नवीकरण के आवेदन पत्र के साथ संलग्न किया जायेगा।

नियम-10-अनवीकृत लाइसेन्स शून्य होंगे

अनवीकृत लाइसेन्स अकृत और शून्य होंगे। लाइसेन्स की अवधि समाप्त होने के बाद यवासवनी से उत्पादित बीयर जब्त या अधिगृहीत किये जाने योग्य होगी और ब्रुअरी में कार्य करने वाले पक्षकार अवैध शराब बनाने के लिए विधि द्वारा विहित शास्ति के लिए उत्तरदायी होंगे परन्तु यह है कि लाइसेंस अस्वीकार किये जाने की स्थिति में, युक्तियुक्त समय के लिए राज्य सरकार के समक्ष पुनरीक्षण के लंबित रहने के दौरान अस्थायी रूप से कार्य जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है।

नियम-11-लाइसेंस की अवधि समाप्त होने पर बीयर इत्यादि को हटाना

लाइसेंस की अवधि समाप्त होने पर जब तक उसे नया लाइसेंस प्रदान नहीं कर दिया जाता और यदि लाइसेंस निरस्त अथवा निलम्बित कर दिया जाता है तो ब्रुअर तत्समय प्रवृत्त नियमों के अनुरूप तुरन्त शुल्क संदाय करने और ब्रुअरी में बची, समस्त बीयर के हटाने के लिए बाध्य होगा। कलेक्टर से लिखित नोटिस प्राप्ति के दस दिन के अन्दर यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है तो ब्रुअरी में आवश्यक नियोजन के लिए स्थापना पर होने वाले व्यय को पूरा करने की जिम्मेदारी यवासवक पर होगी। यदि वह तीन सप्ताह से अधिक समय तक विफल रहता हैं तो बीयर को आबकारी आयुक्त के विवेकानुसार जब्त कर लिया जायगा।

नियम-12-यवासवक द्वारा प्रभारी अधिकारी को कार्यालय उपलब्ध कराया जायगा

यवासवक यवासवनी की सीमा के अन्दर प्रभारी अधिकारी को फर्नीचर सहित कार्यालय उपलब्ध करायेगा।

नियम-13-आबकारी पर्यवेक्षण कर्मचारियों को यवासवक द्वारा आवासीय क्वार्टर उपलब्ध कराये जायेंगे

यवासवक आबकारी आयुक्त के सन्तोषप्रद आवासीय क्वार्टर यवासवनी में नियुक्त राजकीय आबकारी कर्मचारियों को उपलब्ध करायेगा। कर्मचारियों के द्वारा देय किरायेदारी की अन्य शर्तें ऐसी होंगी जैसी आबकारी आयुक्त द्वारा नियत की जायँ।

नियम-14-यवासवनी में बीयर के होने वाले नुकसान आदि के लिए सरकार उत्तरदायी नहीं होगी

राज्य सरकार यवासवनी में संग्रहीत बीयर के आग या चोरी या माप अथवा अन्य दुर्घटना में होने वाली क्षति और नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगी। आग या दुर्घटना का चाहे कोई भी कारण हो, प्रभारी अधिकारी तुरन्त परिसर को दिन या रात के किसी भी समय खुलवाने के लिए उपस्थित होगा।

नियम-15-यवासवक के अभिकर्ताओं तथा सेवकों की नियुक्ति

आसवनियों में आसवकों के अभिकर्ता तथा सेवकों की नियुक्ति को विनयमित करने वाले नियम आवश्यक संशोधन सहित यवासवनियों के अभिकर्ताओं तथा अन्य सेवकों के लिए लागू होंगे।

ख-यवासवनियों की सामान्‍य व्‍यवस्‍था तथा प्रबन्‍ध 

नियम-16-प्रत्येक कमरे,स्थान और पात्र पर सुभेदक चिन्ह अंकित किया जायेगा

प्रत्येक कमरे, के दरवाजे के बाहर और ऐसे स्थान, जिसमें व्यापार किया जाता है तथा प्रत्येक पात्र के सहज दृश्यभाग पर तैल रंग से साफ-साफ अक्षरों में पात्र, बर्तन, कमरा और स्थान का नाम आशयित प्रयोग के उद्देश्य के अनुरूप अंकित किया जायगा। यदि एक से अधिक कमरे या पात्र एक समान उद्देश्य के लिए प्रयुक्त किये जाते हैं तो प्रत्येक को अनुक्रमिक संख्या से सुभिन्न किया जायगा।

नियम-17-पात्रों को स्थापित करने की रीति

मश्टन्स, अंडर बैक, वर्ट रिसवीर (प्राप्ति टंकियों), कौपर और संग्रह करने तथा किण्वन करने वाले पात्रों को ऐसे रखा जायगा तथा स्थापित किया जायगा, जिससे प्रत्येक की अन्तर्वस्तु को सही ढंग से मापा जा सके।

नियम-18-समस्त मश्टन्स तथा अन्य पात्रों को नापा जायगा

समस्त मश्टन्स और किण्वन करने वाले पात्रों की प्रभारी अधिकारी और लाइसेंसी द्वारा संयुक्त रूप से गेजिंग (माप) की जायगी। प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रत्येक पात्र की इम्पीरियल गैलनों (लिटरों) में क्षमता दर्शित करते हुए (या मश्टन्स के मामले में इम्पीरियल बुश में) और प्रत्येक की क्षमता गहराई में इन्च (सेंटीमीटर) के दसवें भाग तक तैयार करते हुए प्रपत्र बी-3 में सारणी तैयार की जायगी।

नियम-19मश्टन्स आदि के स्थापना की सूचना माप तथा परिवर्तनों को स्वीकृत करने के लिए प्रभारी अधिकारी को दी जायगी 

समस्त मश्टन्स, अंडर बैक्स, कूलर्स, किण्वन पात्रों और सैटलिंग बैक्स को इस प्रकार रखा तथा स्थिर किया जावेगा, जिससे उसकी अन्तर्वस्तु की सही नाप या माप द्वारा निश्चित किया जा सके और इसके आकार, स्थिति और क्षमता में परिवर्तन प्रभारी अधिकारी को दो दिन का लिखित नोटिस दिये बिना नहीं किया जायगा।

नियम-20मश्टन्स इत्यादि के स्थापना में परिवर्तन के बाद पुनः माप आवश्यक 

कोई पात्र जिसकी आकृति, स्थिति या क्षमता में परिवर्तन किया गया है, का प्रयोग तब तक नहीं किया जायगा, जब तक कि प्रभारी अधिकारी द्वारा उसे पुनः नाप नहीं लिया जाता है और यदि आवश्यक हो तो नयी सारणी तैयार नहीं कर ली जाती।

नियम-21यवासवक बाट, तुला तथा अन्य उपकरण उपलब्ध करायेगा 

यवासवक पर्याप्त संख्या में और सही एवं चालू हालत में तुलाओं तथा सही विशिष्टियों वाले बाट एवं दूसरे आवश्यक और युक्तियुक्त उपकरणों को रखेगा और प्रभारी अधिकारी या अन्य अधिकारियों द्वारा देखने एवं समस्त पदार्थों तथा यवासवन (ब्रुइंग) में उत्पादित द्रव्यों को तोलने, नापने और मापने के लिए उपलब्ध करायेगा और उन्हें कर्तव्य पालन में सक्षम बनाने के लिए पर्याप्त प्रकाश, सीढ़ी तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध करायेगा।

ग-यवासवनियों का नियन्त्रण

नियम-22आबकारी आयुक्त यवासवनी का प्रभारी अधिकारी नियुक्त करेगा

आबकारी आयुक्त द्वारा प्रत्येक यवासवनी को एक-एक आबकारी निरीक्षक के प्रभार में रखा जायगा जिसे यवासवनी का प्रभारी अधिकारी का नाम दिया जायगा। आबकारी आयुक्त जितने उचित समझे, आबकारी विभाग के दूसरे अधिकारी यवासवनी के प्रभार पर नियुक्त करेगा। ऐसे अधिकारियों का वेतन सरकार द्वारा दिया जायगा किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि जब वार्षिक व्यय राज्य के भीतर के जिलों को यवासवनी से दी गई निकासी पर देय शुल्क के दस प्रतिशत से अधिक हो तो जितना अधिक होगा उतना यवासवक से वसूल किया जायगा।

नियम-23नियंत्रण 

जब तक अन्यथा निर्देशित न हो, प्रभारी अधिकारी उस सहायक आबकारी आयुक्त के पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा, जिसके क्षेत्राधिकार में यवासवनी है और उनसे पत्र व्यवहार करेगा। यवासवनी के कार्य से सम्बन्धित समस्त मामलों में यवासवक सर्वप्रथम प्रभारी अधिकारी को आवेदन करेगा जो यदि आवश्यक होगा तो आदेश प्राप्त करेगा।

नियम-24यवासवनी के परिसर में व्यक्तियों के प्रवेश और व्यवहार पर प्रभारी अधिकारी का नियंत्रण रहेगा

(एक) आसवनी परिसर में व्यक्तियों के प्रवेश और व्यवहार को नियंत्रित करने वाले नियम आवश्यक संशोधन के साथ यवासवनी के परिसर में व्यक्तियों के प्रवेश और व्यवहार के सम्बन्ध में लागू होंगे।

(दो) यवासवनियों से बीयर की निकासी पर नियंत्रण:-

यवासवनी के प्रवेश / निकास द्वार पर यवासवक द्वारा सी.सी.टी.वी. कैमरों की स्थापना निम्नवत् प्रक्रियानुसार की जायेगी:

1. यवासवनियों में प्रवेश एवं निकास हेतु केवल एक ही द्वार होगा ।

2. यवासवक द्वारा प्रवेश / निकास द्वार पर सी.सी.टी.वी. कैमरे की स्थापना की जायेगी।

3. सी.सी.टी.वी. कैमरे 24 घंटे संचालित तथा निरन्तर कार्यशील रहेंगे।

4. यवासवनियों में सी.सी.टी.वी. कैमरे इस प्रकार स्थापित किये जायेंगे, जिससे यवासवनी में बीयर और अन्य उत्पादन लेकर प्रवेश करने वाले तथा बाहर जाने वाले समस्त वाहनों की नम्बर सहित रिकार्डिंग हो सके।

5. सी.सी.टी.वी. की रियल टाइम मानीटरिंग मुख्यालय से इण्टरनेट के माध्यम से करने हेतु यवासवक द्वारा अपने कैमरा / कम्प्यूटर का आई. पी. एड्रेस आबकारी आयुक्त उ०प्र० को उपलब्ध कराया जायेगा ।

6. सी.सी.टी.वी. से की जाने वाली एक माह की रिकार्डिंग पूर्ण हो जाने पर उसकी डी०वी०डी० / हार्डडिस्क / पोर्टेबिल डिस्क बना ली जायेगी और उक्त डी०वी०डी० / हार्डडिस्क / पोर्टेबिल डिस्क पर रिकार्डिंग की अवधि अंकित की जायेगी।

7. डी०वी०डी० / हार्डडिस्क / पोर्टेबिल डिस्क पर प्रभारी अधिकारी यवासवनी / यवासवनी के प्राधिकृत प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे।

8. उक्त मीडिया की एक प्रति प्रभारी अधिकारी यवासवनी के पास तथा दूसरी प्रति यवासवनी प्रबंधन के पास तथा तीसरी प्रति आबकारी आयुक्त उ०प्र० के कार्यालय में अनुरक्षित होगी।

9. एक माह की उक्त स्टोरेज मीडिया तैयार होने के बाद अगले 12 माह तक अनुरक्षित रखा जायेगा।

नियम-25आबकारी पद धारकों की उपस्थिति के घंटे और अवकाश 

आसवनियों में नियुक्त आबकारी पद धारकों के उपस्थिति के घंटे और अवकाश तथा अतिरिक्त समय में किये गये कार्य का नियंत्रित करने वाले नियम यवासवनी में नियुक्त आबकारी पद-धारकों पर भी लागू होंगे।

नियम-26यवासवनी में नियुक्त प्रभारी अधिकारी के विशेष कर्तव्य

प्रभारी अधिकारी का यह विशेष कर्तव्य होगा कि वह देखे कि

(1) विहित प्रपत्र बी-1 में यवासवक के लाइसेंस का समय पर नवीकरण हो गया है,

(2) यवासवक विहित प्रपत्र बी-2 में अपने परिसर और पात्रों की प्रविष्टियां करता है,

(3) यवासवनी में पात्रों और कमरों को उचित प्रकार से संख्यांकित और चिन्हित कर दिया गया है,

(4) यवासवक द्वारा प्रपत्र बी-4 में ब्रुइंग-बुक में तुरन्त और सही ढंग से प्रविष्टियां कर दी गई हैं,

(5) यावसवक द्वारा ब्रुइंग बुक में प्रविष्ट किये गये पदार्थों के अलावा किसी अन्य पदार्थ का प्रयोग नहीं किया गया है,

(6) कोई वार्ट यवासवनी से तब तक नहीं हटाया जायगा, जब तक उसका लेखा नहीं ले लिया गया है,

(7) यवासवनी की व्यवस्था के लिए विहित नियमों का कठोरता से पालन किया जाता है।

नियम-27यन्त्रों का प्रदाय करना

प्रभारी अधिकारी सहायक आबकारी आयुक्त के माध्यम से आवश्यक यन्त्रों जैसे सेकेरोमीटर और थर्मामीटर के लिये आबकारी आयुक्त को मांग पत्र प्रस्तुत करेगा और उसका प्रपत्र बी-5 में लेखा रखेगा। वह उनकी सुरक्षित अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी होगा और यदि कोई यन्त्र उचित सावधानी की कमी के कारण टूट जाता है या नष्ट हो जाता है तो ऐसे नुकसान या क्षति को पूरा करने की उससे अपेक्षा की जा सकती है।

नियम-28अधिकारियों द्वारा निरीक्षण हेतु यवासवनी खुली रहेगी 

यवासवक किसी भी समय कलेक्टर, जिला आबकारी अधिकारी या आबकारी विभाग के किसी अधिकारी, जो श्रेणी में आबकारी निरीक्षक से न्यून न हो तथा जिसके क्षेत्राधिकार में यवासवनी स्थित है, को अपनी यवासवनी परिसरों, भाण्डागारों, उनसे सम्बन्धित पात्रों, किसी कक्ष, स्थान या पात्र, उनमें बनने वाली और संग्रहीत बीयर के निरीक्षण तथा परीक्षण की अनुमति देगा और ऐसे निरीक्षण तथा परीक्षण में निरीक्षण अधिकारियों की समुचित • सहायता करेगा।

नियम-29ब्रुइंग (यवासवन) के पूर्व नोटिस

आबकारी आयुक्त किसी यवासवक से यह अपेक्षा कर सकता है कि वह अपने ब्रू करने के आशय की लिखित सूचना ब्रुइंग के 48 घंटे पूर्व प्रभारी अधिकारी को भेजे।

नियम-30अनिष्टकारक पदार्थों का उपयोग निषिद्ध है 

आबकारी आयुक्त बीयर के विनिर्माण में किसी ऐसे पदार्थ का प्रयोग निषिद्ध कर सकता है, जो उसकी राय में हानिकारक प्रकृति का हो ।

नियम-31नमूने का विश्लेषण

प्रभारी अधिकारी या कोई निरीक्षण करने वाला अधिकारी विश्लेषण के प्रयोजन के लिए बिना कोई भुगतान किये किसी बीयर या उसके विनिर्माण में प्रयुक्त पदार्थ का नमूना ले सकता है।

नियम-32नमूना लेना

समस्त नमूने जो लिये जायँगे, को प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रपत्र 6 में रजिस्टर में दर्ज किया जायेगा और उसके द्वारा सीधे रासायनिक विश्लेषक उत्तर प्रदेश सरकार आगरा को अपेक्षित विश्लेषण की प्रकृति को अधिकथित करते हुए परामर्श टिप्पणी के साथ अग्रसारित किया जायेगा।

घ-कार्य करने का ढंग

नियम-33यवासवक (ब्रुअर) की पुस्तिका 

यवासवक प्रपत्र बी-4 में एक पुस्तिका रखेगा तथा इसके सम्बन्ध में और इसमें की जाने वाली प्रविष्टियों के सम्बन्ध में निम्नलिखित नियमों का पालन करेगा-

(1) वह पुस्तिका को सभी समय अनुज्ञप्त परिसर के किसी भाग में कलेक्टर, प्रभारी अधिकारी या आबकारी निरीक्षक से अनिम्न श्रेणी के आबकारी विभाग के अन्य अधिकारियों के निरीक्षण के लिये तैयार रखेगा और ऐसे अधिकारी को, जो यवासवनी के निरीक्षण के लिये प्राधिकृत है, इसके निरीक्षण करने या उससे उद्धरण लेने के लिए अनुमति देगा,

(2) वह पुस्तिका में माल्ट, अन्न, शर्करा, हाप्स तथा हाप अनुकल्प की, जिन्हें वह आगामी ब्रुइंग में प्रयुक्त करना चाहता है, पृथकतः प्रविष्टि करेगा और आशयित आगामी ब्रुइंग के दिन और घंटे की भी प्रविष्टि करेगा,

(3) वह ब्रुइंग के दिन और घंटे के सम्बन्ध में प्रविष्टि माल्ट या अन्य के मैश (दलिया बनाने) करने या शर्करा का घोलना प्रारम्भ करने से कम से कम 24 घंटे पूर्व करेगा और माल्ट, अन्न, शर्करा, हाप्स या हाप्स अनुकल्प की मात्रा के सम्बन्ध में प्रविष्टि ब्रुइंग के समय की प्रविष्टि से कम से कम 2 घंटे पूर्व करेगा,

(4) वह मश्टन्स में दानों से समस्त वार्ट्स के निकालने की प्रविष्टि यवासवन (ब्रुइंग) के समय की दर्ज प्रविष्टि से कम से दो घंटे पूर्व करेगा,

(5) वह किण्वन पात्र में वार्ट्स के एकत्रित होने के एक घंटे के भीतर या यदि वार्ट्स सांयकाल 6 बजे तक एकत्रित नहीं किये जा सकते हों तो दूसरे दिन प्रात: 8 बजे से पूर्व प्रत्येक ब्रुइंग में उत्पादित वार्ट्स की डिप और घनत्व एवं पात्रों का वर्णन या संख्या, जिनमें वार्ट्स ले जाया गया है, की प्रविष्टि करेगा,

(6) वह प्रविष्टि करते समय, प्रविष्टि करने का दिनांक भी डालेगा,

(7) वह पुस्तिका की किसी प्रविष्टि को निरस्त, उसका लोप या उसे परिवर्तित नहीं करेगा और उसमें ऐसी प्रविष्टि नहीं करेगा जो किसी प्रकार असत्य हो । यदि किसी प्रविष्टि को शुद्ध करना आवश्यक हो तो अशुद्ध प्रविष्टि के आर-पार ऐसे ढंग से रेखा खींची जायेगी, जो उसे स्पष्टतः द्रष्टव्य बनाये रखे और संशोधित प्रविष्टि को इसके ऊपर अन्तर्विष्ट कर दिया जायगा। प्रत्येक शुद्धि पर उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा उसी समय लघु हस्ताक्षर किये जायेंगे।

नियम-34

किसी ब्रुइंग (यवासवन) के उत्पाद को तब तक दूसरे ब्रुइंग के उत्पाद के साथ नहीं मिलाया जायगा, जब तक उसका लेखा न कर लिया जाय यवासवक प्रत्येक ब्रुइंग के उत्पादों को दूसरे ब्रुइंग के उत्पादों से पृथक् रखेगा, जब तक उसकी मात्रा या घनत्व के बारे में प्रभारी अधिकारी द्वारा लेखा नहीं लिया जाता है।

नियम-35जब मिश्रण किया जाय तब सूचना देनी होगी

यवासवक एक ब्रुइंग के उत्पादों को दूसरे के उत्पादों से तब तक नहीं मिलायेगा जब तक उसने इसकी लिखित में पूर्व सूचना प्रभारी अधिकारी को न दे दी हो। जब मिश्रण कर लिया जाय तो यवासवक परिमाणित मिश्रण की मात्रा तथा घनत्व विनिर्दिष्ट करेगा।

नियम-36

वार्ट्स के निकालने के पश्चात् दानों को मश्टन्स से हटाने के लिये विहित समय-पुस्तिका में वाट्स के निकालने के समय की प्रविष्टि के एक घंटे के बाद तक मश्टन्स में समस्त दानों को बिना स्पर्श किये रखा जायगा, जब तक प्रभारी अधिकारी द्वारा उपस्थित होकर दानों का लेखा नहीं लिया गया हो।

नियम-37-वार्ट्स को उत्पाद के क्रम से निकाला जायगा

समस्त वार्ट्स को क्रमवार और ब्रुइंग के प्रचलित क्रम में अन्डर बैक, कौपर, कूलर और किण्वन पात्र में हटाया जायगा और अन्तिम पात्र से तब तक नहीं हटाया जायगा जब तक प्रभारी अधिकारी द्वारा उसका लेखा नहीं ले लिया गया हो और जब तक वाट्स को इन पात्रों में एकत्रित हुए 24 घंटे नहीं हो गये हो

नियम-38ब्रुइंग (यवासवन) के उत्पाद के एकत्र करने के लिए नियत समय

जब वार्ट्स का किण्वन पात्रों में पहुँचना प्रारम्भ हो जाय तब उसके 18 घंटे के भीतर ब्रुइंग के समस्त उत्पाद को एकत्र किया जाना चाहिए।

नियम-39 कचरे से स्प्रिट का निकालना निषिद्ध है 

यवासवनी के परिसर में बीयर के अलावा अन्य कोई शराब का विनिर्माण नहीं किया जायगा। दानों या यवासवनी के कचरे से स्पिरिट निकालने का कोई प्रयास नहीं किया जायगा।

नियम-40फिनिंग्स के अलावा बीयर में अन्य पदार्थों के मिलाये जाने का निषेध

यवासवक बीयर को फिनिंग्स या आबकारी आयुक्त द्वारा स्वीकृत पदार्थों के अलावा अन्य किसी पदार्थ से तनु, परिवर्तित या मिश्रित नहीं करेगा।

ङ-बीयर की निकासी 

नियम-41बीयर की निकासी तब तक नहीं की जायगी, जब तक शुल्क न अदा किया जाय या बन्ध पत्र निष्पादित न किया जाय

यवासवनी से बीयर तब तक हटायी नहीं जायगी, जब तक संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम, 1910 (अधिनियम IV, 1910) की धारा 28 के अधीन अधिरोपित प्रतिफल शुल्क का भुगतान न कर दिया गया हो या अधिनियम की धारा 19 के अधीन प्रपत्र बी-7 तथा बी-8 में यवासवक द्वारा शीघ्र यवासवनी से राज्य के बाहर निर्यात के लिए बन्धपत्र निष्पादित नहीं कर दिया गया हो।

नियम-42शुल्क के वसूलने के तरीके 

शुल्क की वसूली निम्नलिखित दो तरीकों में से किसी एक प्रकार से की जायेगी –

(1) उपकोषागार, या यदि उस स्थान पर उपकोषागार नहीं हो तो उस जिले के कोषागार में, नकद भुगतान द्वारा,

(2) इस प्रयोजन के द्वारा रखे गये किसी अग्रिम लेखे से पुस्तक जमा द्वारा,

नियम-43 नकद शुल्क प्रस्तुत करने का तरीका 

यदि यवासवक शुल्क का भुगतान नकद में करना चाहता है तो वह उपकोषागार या कोषागार, जैसी स्थिति हो में आवेदन पत्र प्रपत्र बी-9 में तीन प्रतियों में प्रस्तुत करेगा जिसके सही होने का सत्यापन प्रभारी अधिकारी द्वारा किया जायगा। कोषागार या उपकोषागार का लेखा पाल यह सत्यापन करने के पश्चात् कि प्रस्तुत की रकम कोषागार द्वारा जमा कर ली गई है, आवेदन पत्र की सभी प्रतियों के पृष्ठांकन में रकम भरेगा। इसके पश्चात् वह उप कोषागार या कोषागार के प्रभारी अधिकारी को प्रस्तुत करेगा, जो रकम के जमा होने की रसीद के रूप में अपने हस्ताक्षर तथा मुद्रा अंकित करेगा। आवेदन पत्र की एक प्रति आवेदन कर्ता को दी जायगी, द्वितीय प्रति यवासवनी के प्रभारी अधिकारी को दी जायगी और तृतीय प्रति अभिलेख में रखी जायगी।

नियम-44यवासवक की अग्रिम जमा से शुल्क की अदायगी 

यवासवकों को यवासवनी से समय समय पर हटाये जाने वाली बीयर पर आबकारी शुल्क के लिए अग्रिम भुगतान करने की अनुमति दी जाती है। ऐसे हटाये जाने की अनुमति हटायी गई बियर के प्रत्येक परेषण के लिए बिना शुल्क की पृथक् अदायगी के अग्रिम की सीमा तक दी जायेगी। कोई मूल अग्रिम जमा 2000 रुपये से कम नहीं होगी और प्रत्येक बार अग्रिम की पुन: पूर्ति की जायगी यह ऐसी धनराशि की होनी चाहिए जो उस धनराशि से कम न हो।

नियम-44 (क)-फीस का जमा किया जाना

यवासवनियों बीयर की थोक बिकी से प्राप्त मांग पत्र में अन्तर्विष्ट प्रतिफल फीस और अतिरिक्त प्रतिफल फीस को ऐसे मांग पत्रों की प्राप्ति से 2 कार्य दिवसों के भीतर राजकीय कोषागार में जमा करेंगी, जिसमें विफल होने पर 5000 /- रूपये (पांच हजार रूपये) प्रतिदिन यवासवनी पर शास्ति अधिरोपित की जायेगी।

नियम-45अग्रिम जमा के विरुद्ध बीयर को हटाने के लिए आवेदन पत्र का प्रारूप

बीयर, जिस पर शुल्क अग्रिम के विरुद्ध काट लिया गया हो, को हटाने के लिए आवेदन-पत्र प्रपत्र बी-10 में होगा। अग्रिम जमा के रजिस्टर का प्रारूप-अग्रिम जमा का रजिस्टर प्रपत्र बी-11 में होगा।

नियम-46यवासवनी से बीयर की सिवाय पास के अधीन हटाये जाने की अनुमति नहीं दी जायेगी

बीयर को हटाने की अनुमति इस कार्य के लिए प्राधिकृत प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रदान किये गये प्रपत्र बी-12 में पास के अलावा नहीं दी जायेगी। पास या तो शुल्क की पूर्व अदायगी के साक्ष्य पर या बन्ध पत्र के निष्पादन के साक्ष्य पर जारी किया जायगा। यह तीन प्रतियों में होगा, एक प्रति परिवहन या निर्यात को रक्षित करने के लिए दी जायेगी, द्वितीय प्रति आयात या परिवहन करने वाले जिले के मुख्य राजस्व अधिकारी को अग्रसारित की जायगी और तृतीय प्रति अभिलेख में रखी जायेगी।

नियम-47 यवासवनी से बीयर की निकासी का तरीका 

यवासवनी से बीयर की निकासी दी जायगी:-

(1) यवासवक के थोक विक्रय परिसर को परिवहन के लिये शुल्क की पूर्व अदायगी पर,

(2) भारत में अन्य राज्यों को निर्यात के लिए बन्ध पत्र के अधीन।

नियम-48बन्ध पत्र के अधीन निर्यात के लिए पास की अपेक्षा की जायगी

कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश में यवासवनी में विनिर्मित बीयर को भारत में किसी स्थान को निर्यात इस कार्य के लिए प्राधिकृत यवासवनी के प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रपत्र 12 में प्रदत्त पास के अधीन और विदेशी स्पिरिट के निर्यात के लिए नियमों के अनुरूप बन्ध पत्र के अधीन कर सकता है। सामान्य बन्ध पत्र प्रपत्र बी-7 और विशेष बन्ध पत्र प्रपत्र बी-8 में निष्पादित किया जायगा।

च-स्वीकृत अपचय (छीजन) तथा शुल्क की वापसी 

नियम-49-दुर्घटना द्वारा नष्ट होना

जब कोई माल्ट शराब जिस पर शुल्क भारित कर दिया गया है और अदा कर दिया गया है, दुर्घटना, आग या अन्य अपरिहार्य कारणओं से यवासवक के विनिर्दिष्ट परिसर में नष्ट हो जाती है तब राज्य सरकार अपने सन्तोष हेतु नुकसान के साक्ष्य पर इस प्रकार भारित या संदत्त शुल्क को माफ कर सकती है या वापस करने के आदेश दे सकती है।

नियम-50शुल्क की वापसी

(1) जब बीयर जिस पर शुल्क भारित और संदत्त किया जा चुका है उपभोग के अनुपयुक्त हो जाती है तब कलेक्टर के माध्यम से यवासवक का औपचरिक दावा प्राप्त होने पर आबकारी आयुक्त शुल्क की वापसी का आदेश दे सकता है किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि ऐसा दावा शुल्क के संदाय के छ: मास की अवधि में किया गया हो।

(2) यदि बीयर वापस लौटा दी जाती है तो यह तथ्य बीजक प्राप्त होने के तुरन्त बाद प्रभारी अधिकारी को सूचित किया जाना चाहिए। परेषण की प्राप्ति पर प्रभारी अधिकारी द्वारा जाँच किया जाना चाहिए और प्रस्तुत किये गये दावा को उसके द्वारा प्रमाणित किया जाना चाहिए।

(3) दावा में अन्तर्विष्ट होना चाहिए-

(क) यह घोषणा कि बीयर, जो दावा के अध्यधीन है, यवासवक द्वारा ब्रू (यवासवित) की गई है,

(ख) उन परिस्थितियों का विवरण जिनके कारण दावा देय हुआ,

(ग) तारीख और तारीखों का विवरण जब बीयर ब्रू (यवासवित) की गई और दावा में सन्दर्भित बीयर के प्रत्येक समूह (लौट) की मात्रा और मूल घनत्व और

(घ) यह विवरण कि बीयर का निस्तारण (1) उसे नष्ट करके, या (2) उसे सिरके में परविर्तित करके प्रस्तावित है,

(4) जब ऐसा करने की अपेक्षा की जाय तब यवासवक को अपने दावे में वर्णित किसी भी तथ्य का संतोषजनक प्रमाण प्रस्तुत करना चाहिए।

(5) जैसे ही आबकारी आयुक्त का वापिसी के संबंध में आदेश प्राप्त हो जाय वैसे ही चार्ज के सहायक आबकारी आयुक्त से प्रपत्र बी-13 या बी-14 में यह प्रमाण पत्र प्राप्त होने पर कि बीयर उनकी उपस्थिति में नष्ट कर दी गई, या (2) सिरके में परिवर्तित कर दी गई है कलेक्टर यथाशीघ्र रिफंड देगा।

नियम-51बीयर जिसके शुल्क की वापसी का दावा किया गया है का परीक्षण किया जा सकता है

निकासी करने वाली यवासवनी में बीयर के वापिस प्राप्त होने पर शुल्क की वापिसी के मामले में कलेक्टर आवेदन कर्ता से यह अपेक्षा कर सकता है कि संपूर्ण बीयर या उसके किसी अंश को, जिसके लिये शुल्क की वापिसी का दावा किया गया है प्रस्तुत करे और उसके किसी अंश में यह उचित समझे, कराये और कलेक्टर किसी अधिकारी को उक्त बीयर के सम्बन्ध में जाँच या परीक्षण, जिसे वह आवश्यक समझे, करने के लिए नियुक्त कर सकता है।

नियम-52त्रैमासिक लेखा 

आबकारी वर्ष के प्रत्येक त्रैमास के बाद प्रथम मास की 7वीं तारीख को प्रत्येक यवासवक द्वारा चार्ज के सहायक आबकारी आयुक्त को प्रपत्र बी-15 में लेखा भेजा जायगा, जिसमें बिना बिके वापस की गई कुल मात्रा और शुल्क की वापिसी के रूप में दावा की गई तथा प्राप्त धनराशि दर्शित की जायगी। सहायक आबकारी आयुक्त प्रविष्टियों की जांच करने के बाद, इसकी एक प्रति आबकारी आयुक्त को उनके कार्यालय में अभिलेख हेतु त्रैमास की समाप्ति के बाद अनुवर्ती मास की 15 तारीख को अग्रसारित करेगा।

नियम-53-स्टाक का त्रैमासिक परीक्षण

प्रत्येक कलेन्डर मास के अंतिम कार्य दिवस को उस दिन की समस्त निकासी हो जाने के पश्चात् प्रभारी अधिकारी यवासवनी के लेखे की परीक्षा करेगा और यवासवनी में बीयर के हस्तगत स्टाक की जांच करेगा। यदि ऐसी जांच करने पर यवासवनी के स्टाक में बीयर की मात्रा स्टाक लेखे में वर्णित हस्तगत मात्रा से अधिक पायी जाय तो यवासवक ऐसे आधिक्य पर साधारण निकासी के लिये विहित दर से उपशुल्क का देनदार होगा यदि बीयर की मात्रा स्टाक लेखे में वर्णित मात्रा से कम पायी जाय और ऐसी कमी पूरे महीने में बीयर के कुछ स्टाक के नौ प्रतिशत से अधिक न हो तो उसकी गणना नहीं की जायगी क्योंकि यवासवनी के भीतर वाष्पीकरण, दूषित होने तथा अन्य आकस्मिक घटना के कारण हुई हानि की पूर्ति के लिये उस सीमा तक छूट दी गई है। किन्तु यदि स्टाक में यह कमी नौ प्रतिशत से अधिक पायी जाय तो मामले की जांच की जायेगी और उसके परिणाम की रिपोर्ट आबकारी आयुक्त को की जायेगी जो ऐसी कमी पर, जो नौ प्रतिशत से अधिक हो, साधारण निकासी के लिये विहित दर से उपशुल्क उद्ग्रहीत करने का निदेश दे सकता है। इस नौ प्रतिशत उपशुल्क मुक्त छूट की गणना अन्तिम बार स्टाक की जांच के समय वस्तुत: सुनिश्चित हस्तगत शेष मात्रा और जब से निर्माण किया गया या जो प्राप्त हुआ, उसकी कुल मात्रा जैसा कि (प्रपत्र बी-16 में) निर्माण तथा जारी किये जाने के रजिस्टर में स्तम्भ 2 तथा 3 में दिखायी गई हो, से की जायगी।

छ: पर्यवेक्षण 

नियम-54-सहायक आबकारी आयुक्त द्वारा निरीक्षण 

चार्ज का सहायक आबकारी आयुक्त प्रत्येक दो मास में कम से कम एक बार यवासवनी का निरीक्षण करेगा।

नियम-55-व्यापारिक गोपनीयता 

प्रभारी अधिकारी किसी भी व्यक्ति को यवासवनी के कार्य की प्रकृति और सीमा के सम्बन्ध में बताने से विरत रहेगा।

नियम-56मश्टन्स की गेजिंग (माप)

मश्टन्स की गेजिंग (माप) शुष्क विधि से की जायगी, जिसके माप आभासी तल (फाल्स बौटम) के ऊपर से लिये जायँगे लेकिन सारणी आर्द्र विधि से तैयार की जायगी यानी आभासी तल के शीर्ष से और किसी “ड्रिप” को लेखे में नहीं लिया जायगा।

नियम-57-मध्यवर्ती माप तथा घनत्व यवासवनी में केवल जांच हेतु होंगे

ब्रुइंग (यवासवन) के दौरान लिये गये माप और घनत्व केवल जांच के लिए होंगे और शुल्क के आरोपंण या उत्पाद की के लिये आधार नहीं बनाये जाने चाहिए।

नियम-58-प्रभारी अधिकारी डिप्स और घनत्व का विनिश्चय लाइसेन्सी के लिए नहीं करेगा 

प्रभारी अधिकारी किसी एकत्रित वार्ट्स की मात्रा और घनत्व का विनिश्चय लाइसेंसी के लिए नहीं करेगा।

ज-सामान्य 

नियम-59-प्रभारी अधिकारी तथा यवासवक द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टर

यवासवनी में निम्नलिखित रजिस्टर रखे जायेंगे-

(क) प्रभारी अधिकारी द्वारा-

(i) प्रपत्र बी -6 मश्टन्स और वार्ट्स के विश्लेषण के लिये गये नमूनों का रजिस्टर,

(ii) प्रपत्र बी-3 में गेज (माप) की सारिणी का रजिस्टर,

(iii) प्रपत्र बी-11 में जमा शुल्क के विरुद्ध बीयर की निकासी का रजिस्टर,

(iv) प्रपत्र बी – 16 में बीयर के विनिर्माण तथा निकासी का रजिस्टर,

(v) प्रपत्र बी-17 में यवासवनी को लौटायी गयी बीयर का रजिस्टर,

(ख) यवासवक द्वारा-

(i) प्रपत्र बी-2 में परिसर तथा बर्तनों के सम्बन्ध में प्रविष्टि के विवरण का रजिस्टर,

(ii) प्रपत्र बी-4 में ब्रुइंग (यवासवन) की पुस्तिका

नियम-60-यवासवनी के वार्षिक विवरण का भेजना 

प्रत्येक यवासवक आबकारी वर्ष के लिए 5 दिसम्बर तक प्रपत्र बी-18 में अपनी यवासवनी से सम्बन्धित विवरण दो प्रतियों में प्रभारी अधिकारी के माध्यम से कलेक्टर को प्रस्तुत करेगा। कलेक्टर प्रविष्टियों की सत्यता के बारे में संतुष्ट होने पर विवरण की एक प्रति आबकारी आयुक्त को 15 दिसम्बर तक अग्रसारित करेगा।

नियम-61

यवासवक प्रभारी अधिकारी को किसी भी मामले की सूचना देने के लिए बाध्य होगा जिसमें उसके नियोजन में किसी व्यक्ति को आबकारी विधियों या उसके नियोजन को विनियमित करने वाली शर्तों तथा निर्बन्धनों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है।

नियम-62-लघु यवासवनी हेतु लाइसेंस

होटल/रिसॉर्ट/रेस्टोरेंट/वाणिज्यिक क्लब हेतु जारी बार लाइसेंस युक्त परिसर में ड्राट बीयर का उत्पादन किये जाने एवं उसे परोसे जाने के लिये प्रपत्र एमबी-1 में लाइसेंस स्वीकृत किया जायेगा।

नियम-63-लघु यवासवनी के लिये लाइसेंस प्रदान करने की प्रक्रिया

(1) कोई व्यक्ति, जो होटल/रिसॉर्ट/रेस्टोरेन्ट/वाणिज्यिक क्लब हेतु बार लाइसेंस धारण करता हो और लघु यवासवनी हेतु लाइसेंस प्राप्त करना चाहता हो, उस जिले के कलेक्टर, जहाँ लघु यवासवनी स्थापित किया जाना प्रस्तावित हो, के माध्यम से आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश को आवेदन करेगा। लाइसेंस की स्वीकृति हेतु आवेदन-पत्र प्रपत्र एम0बी0-2 में किया जायेगा। आवेदन-पत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किये जायेंगे—

(एक) किसी वर्ष अथवा उस वर्ष के आंशिक भाग, जिसके लिये लाइसेंस स्वीकृत हो, के लिये अग्रिम में जमा किया गया रुपये 50,000.00 (पचास हजार रुपये) का ट्रेजरी चालान।

(दो) अक्षांश एवं देशान्तर सहित परिसर का पूर्ण विवरण।

(तीन) प्लांट की प्रतिदिन की अधिष्ठापित क्षमता।

(चार) प्रस्तावित लघु यवासवनी के निर्माण हेतु विवरण एवं मानचित्र।

(पाँच) लघु यवासवनी की स्थापना हेतु उपकरणों की सूची।

(छः) विधिमान्य बार लाइसेंस की प्रति।

(सात) प्रपत्र एम0बी0-3 में घोषणा-पत्र।

(आठ) आवेदक को बाध्यकारी करते हुए भारतीय स्टाम्प अधिनियम के अनुसार अपेक्षित मूल्य के नान-जुडिशियल स्टाम्प पेपर पर विहित प्रपत्र एम0बी0-4 में ऐसा वचनबन्ध कि वह उत्पाद की विशिष्टताओं और गुणवत्ता को अनुरक्षित करने के लिये समय-समय पर आबकारी आयुक्त द्वारा यथाविहित मानकों के अनुसार उपकरण परिनिर्मित करेगा।

(2) प्रत्येक आवेदन पत्र की सम्बन्धित जिले के कलेक्टर अथवा उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत जिला आबकारी अधिकारी द्वारा संवीक्षा की जायेगी। तत्पश्चात जिले का कलेक्टर अपनी संस्तुति, आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश को लाइसेंस स्वीकृत किये जाने हेतु अग्रेषित करेगा।

(3) ऐसी जाँच जैसा कि वह उचित समझे, कराये जाने पर और आवेदक की नियमितता तथा कार्यक्षमता के सम्बन्ध में स्वयं का समाधान करने के पश्चात आयुक्त, राज्य सरकार के अनुमोदन से प्रपत्र एम0बी0-5 में लघु यवासवनी की स्थापना हेतु लाइसेंस स्वीकृत कर सकता है।

(4) लाइसेंस प्राप्त करने के पश्चात, आवेदक एक वर्ष के भीतर उपकरण परिनिर्मित करेगा, जिसमें विफल रहने पर उपनियम (1) के अधीन संदत्त फीस समपहृत हो जायेगी यदि लाइसेंसधारक, विशिष्टताओं तथा गुणवत्तायुक्त मानकों के अनुसार यवासवनी चलाये जाने में विफल रहता है तो स्वीकृत लाइसेंस किसी नुकसान या क्षति के प्रतिकर के बिना निरस्त किये जाने योग्य होगा। लाइसेंसधारक छः माह तक लाइसेंस के विस्तार हेतु रुपये 25,000.00 (पच्चीस हजार रुपये मात्र) की अतिरिक्त फीस का भुगतान करके आवेदन कर सकता है।

(5) लघु यवासवनी की स्वीकृति हेतु लाइसेंस फीस दो लाख रुपये प्रतिवर्ष होगी।

(6) जैसे ही उपकरणों की स्थापना हो जायेगी लाइसेंसधारक लघु यवासवनी के सम्बन्ध में प्रपत्र एम0बी0-6 में आवेदन, प्रपत्र एम0बी0-5 में लाइसेंस स्वीकृत किये जाने के दिनांक से एक वर्ष के भीतर आबकारी आयुक्त को जमा करेगा, जिसके साथ निम्नलिखित दस्तावेज जमा किये जायेंगे—

(एक) लाइसेंस स्वीकृत किये जाने हेतु अपेक्षित लाइसेंस फीस की धनराशि का चालान;

(दो) अपेक्षित धनराशि की प्रतिभूति जमा की नियत जमा रसीद;

(तीन) स्थानीय जल उपयोगिता, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण-पत्र और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण से लाइसेंस/रजिस्ट्रीकरण;

(चार) करार का प्रतिलेख।

(7) जहाँ आयुक्त का यह समाधान हो जाये कि लाइसेंसधारक ने शर्तों को पूरा कर लिया है और विशिष्टता तथा गुणवत्तायुक्त मानकों के अनुसार बीयर का उत्पादन करने हेतु तैयार है, तो वह लघु यवासवनी हेतु लाइसेंस प्रपत्र एम0बी0-1 में स्वीकृत कर सकता है।

(8) प्रपत्र एम0बी0-1 में लाइसेंस स्वीकृत किये जाने के पूर्व आबकारी आयुक्त द्वारा प्राधिकृत आबकारी अधिकारी परिसर आदि का निरीक्षण करेगा और पूर्वोक्त योजना एवं प्रविष्टियों से उसका मिलान कर तदनुसार प्रमाणित करेगा।

(9) किसी प्रकार की बीयर का उत्पादन नहीं किया जायेगा और कोई व्यक्ति बीयर उत्पादन के प्रयोजनार्थ किसी पदार्थ, बर्तन, साधन एवं उपकरण, जो भी हो, का बिना किसी प्राधिकार के और आबकारी आयुक्त द्वारा प्रपत्र एम0बी0-1 में स्वीकृत लाइसेंस के निबन्धन एवं शर्तों के अध्यधीन उपयोग नहीं करेगा अथवा अपने पास नहीं रखेगा।

(10) आगामी तीन आबकारी वर्षों तक के लिये नवीकरण हेतु आवेदन प्रत्येक वर्ष के लिये 2.00 लाख रुपये की ट्रेजरी चालान के साथ प्रत्‍येक वर्ष की 28 फरवरी को या इससे पूर्व कलेक्टर को प्रपत्र एम0बी0-7 में किया जायेगा। यदि प्लांट या भवन में परिवर्तन हुआ हो तो नया मानचित्र प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई परिवर्तन नहीं किया गया हो तो प्रभारी अधिकारी की ओर से इस आशय का प्रमाण-पत्र लाइसेंस नवीकरण हेतु आवेदन-पत्र के साथ संलग्न करना होगा।

नियम64-लघु यवासवनियों हेतु लाइसेंस स्वीकृत किये जाने पर प्रतिबन्ध

प्रपत्र एम.बी.-1 में लाइसेंस तब तक स्वीकृत नहीं किया जायेगा, जब तक लघु यवासवनी संयंत्र हेतु प्रयुक्त स्थान सहित बार परिसर का न्यूनतम क्षेत्रफल 250 वर्ग मीटर न हो।

नियम65-लघु यवासवनी लाइसेंस स्वीकृत किये जाने हेतु अपात्र व्यक्ति

निम्न व्यक्ति लाइसेंस स्वीकृत किये जाने हेतु पात्र नहीं हैं:-

(एक) 21 वर्ष से कम के आयु के व्यक्ति;

(दो) ऐसे व्यक्ति जो अनुमोदित दिवालिया हों या जो अपराधों या स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (अधिनियम संख्या-61 सन 1985) या गैरजमानतीय अपराधों के लिए दोषी ठहराये गये हों;

(तीन) सरकार के आबकारी राजस्व के भुगतान में व्यतिक्रमी हों;

नियम66-निदेशों का अनुपालन करने में विफल होने पर लघु यवासवनी के आवेदन-पत्र को निरस्त किया जाना

यदि लाइसेंसधारक, विशिष्टताओं तथा गुणवत्तायुक्त मानकों के अनुसार यवासवनी चलाने में विफल हो तो स्वीकृत लाइसेंस, किसी क्षति या नुकसान के बिना रद्द किये जाने योग्य होगा।

नियम-67-लघु यवासवनी लाइसेंस की अवधि और व्यवसाय का प्रारम्भ

प्रत्येक लघु यवासवनी का लाइसेंस तीन वर्ष तक के लिये, जो 1 अप्रैल से प्रारम्भ होकर 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष, जैसा कि उल्लिखित हो, तक के लिये यथाविहित लाइसेंस फीस का भुगतान किये जाने के अध्यधीन विधिमान्य होगा।

परन्तु यह कि 1 अप्रैल या उसके पश्चात जारी किया गया लाइसेंस भी 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष, जैसा कि उल्लिखित हो, तक विधिमान्य रहेगा।

नियम68-लघु यवासवनी हेतु लाइसेंस फीस

(1) लाइसेंस फीस दो लाख रुपये प्रति वर्ष होगी। लाइसेंस फीस का भुगतान लाइसेंस प्राप्त परिसर के स्थित होने वाले जिला में सम्बन्धित कोषागार को ट्रेजरी चालान के माध्यम से किया जायेगा।

(2) लाइसेंसधारी, आबकारी आयुक्त के नाम से किसी अनुसूचित बैंक द्वारा जारी सावधि जमा रसीद के रूप में 100000.00/- रुपये (एक लाख रुपये) की प्रतिभूति जमा प्रस्तुत करेगा।

नियम69-लघु यवासवनी लाइसेंस का अभ्यर्पण

लाइसेंसधारी को लाइसेंस अभ्यर्पित करने के एक माह पूर्व नोटिस देना होगा।

नियम70-लघु यवासवनी में प्रतिभूति का समायोजन किया जाना

जहाँ कोई लाइसेंस, लाइसेंस के नियमों तथा शर्तों का उल्लंघन किये जाने के कारण निरस्त या निलम्बित हो जाता है वहाँ आबकारी आयुक्त, लाइसेंसधारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी प्रतिभूति जमा को उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर पूर्णतः या आंशिक रूप से समपहृत करने का आदेश दे सकता है और ऐसी समपहृत धनराशि की प्रतिपूर्ति लाइसेंसधारी द्वारा 15 दिनों के भीतर की जायेगी। यदि लाइसेंसधारी निर्धारित समय में समपहृत प्रतिभूति की सीमा तक प्रतिपूर्ति करने में विफल रहता है तो लाइसेंस स्वतः निरस्त हुआ समझा जायेगा।

नियम71लघु यवासवनी लाइसेंस की शर्तें

(1) लाइसेंसधारी संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम, 1910 के उपबन्धों और तदधीन जारी अधिसूचनाओं तथा आदेशों द्वारा आबद्ध होगा।

(2) लाइसेंसधारी ड्राट बीयर के उत्पादन, संचयन एवं परोसने को नियंत्रित किये जाने के सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा यथाविहित नियमों या आबकारी आयुक्त द्वारा समय-समय पर जारी किये जाने वाले अनुदेशों तथा आदेशों का अनुपालन करेगा।

(3) लाइसेंसधारी अपनायी जाने वाली बीयर उत्पादन की प्रक्रिया तथा उत्पादित किये जाने वाली तथा परोसे जाने वाली बीयर के मानकों तथा गुणवत्ता के सम्बन्ध में राज्य सरकार या आबकारी आयुक्त द्वारा पारित किये जाने वाले आदेशों से आबद्ध होगा।

(4) लाइसेंसधारी लघु यवासवनी में वाश का घनत्व मापने के लिये आबकारी आयुक्त द्वारा अनुमोदित सेक्रोमीटर एवं थर्मामीटर उपलब्ध करायेगा। ड्राट बीयर की तीव्रता मापने के लिये एक हाइड्रोमीटर भी उपलब्ध कराया जायेगा।

(5) ग्राहकों को प्रस्तुत तथा उपलब्ध करायी जाने वाली बीयर में अल्कोहल की मात्रा 8 प्रतिशत वी/वी से अधिक नहीं होगी।

(6) मैच्योरेशन स्तर तक ब्रू का पी0एच0, तापमान एवं विनिर्दिष्ट घनत्व प्रपत्र एम0बी0-8 में अभिलिखित किये जाने चाहिये और वे सक्षम प्राधिकारी द्वारा माँग किये जाने पर निरीक्षण के अध्यधीन होंगे।

(7) परिसर को समुचित वातायन एवं प्रकाश व्यवस्था सहित साफ-सुथरा रखा जायेगा और यह समस्त प्रकार की सुरक्षा तथा आपात मानकों के अनुरूप हो और साथ ही साथ ग्लास, परोसने की मेज आदि सहित बीयर वितरण प्रणाली को स्वास्थ्य की दृष्टि से सदैव अनुरक्षित रखा जाय।

(8) संचय टैंकों एवं परिसर में समय-समय पर धूम्रीकरण प्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा नियमित रूप से किया जायेगा और उसे अभिलेखों में अनुरक्षित रखा जायेगा।

(9) किसी भी दशा में नाबालिगों को बीयर या अन्य अल्कोहलिक पेय परोसा नहीं जायेगा।

(10) लाइसेंस फीस एवं यथाविनिर्दिष्ट आबकारी शुल्क का संदाय अग्रिम रूप में किया जायेगा।

(11) लाइसेंसधारी को विनिर्दिष्ट रूप से रजिस्ट्रीकृत बीयर के सिवाय अन्य किसी प्रकार की बीयर का उत्पादन करने से प्रतिषिद्ध किया जायेगा।

(12) लघु यवासवनी में निकासी से सम्बन्धित लेन-देन का लेखा-जोखा आबकारी आयुक्त द्वारा यथापेक्षित रूप में अनुरक्षित किया जायेगा।

(13) लाइसेंसधारी बीयर के उत्पादन एवं बिक्री से सम्बन्धित यथापेक्षित आँकड़े किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा माँग किये जाने पर उपलब्ध करायेगा।

(14) इस नियमावली के किसी उपबन्ध अथवा तदधीन जारी किये गये अनुदेशों का उल्लंघन किये जाने तथा लाइसेंस की शर्तों को भंग किये जाने पर आबकारी आयुक्त द्वारा अधिनियम के सुसंगत उपबन्धों के अनुसार लाइसेंसधारी इकाई के विरुद्ध समुचित कार्यवाही की जायेगी।

(15) लघु यवासवनी की अधिष्ठापित क्षमता प्रतिदिन 600 (छः सौ) बल्क लीटर और किसी वर्ष में 350 कार्य दिवस के आधार पर 2.10 लाख (दो लाख दस हजार) बल्क लीटर प्रतिवर्ष से अधिक नहीं होगी।

(16) इस प्रकार उत्पादित ड्राट बीयर को न बोतलों में भरा जायेगा और न ही परिसर से बाहर उसकी बिक्री की जायेगी। ड्राट बीयर को गिलास/पिचर में परोसा जायेगा।

(17) संचय टैंकों से तैयार उत्पाद को उपभोग के स्थान हेतु, जब अपेक्षित होगा, निकाला जायेगा।

परन्तु यह कि विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार की पूर्वानुमति से आबकारी आयुक्त द्वारा भू-गृहादि के बाहर ड्राट बीयर के उपभोग की अनुमति प्रदान की जा सकेगी।

(18) लघु यवासवनी में उत्पादित बीयर की शेल्फ लाइफ मात्र 72 घंटे होगी।

(19) लाइसेंसधारी को लघु यवासवनी संयंत्र वाले कक्ष में ऐसा सी0सी0टी0वी0 कैमरा स्थापित करना होगा, जिससे आबकारी मुख्यालय से आई0पी0 एड्रेस के माध्यम से सुगमतापूर्वक अनुश्रवण किया जा सके।

(20) लाइसेंसधारी आबकारी विभाग की विनिर्दिष्ट वेबसाइट पर सुसंगत सूचना एवं लेखा-जोखा ऑनलाइन प्रस्तुत किये जाने हेतु आवश्यक व्यवस्था करेगा।

नियम72-लघु यवासवनी में रसायनज्ञ की नियुक्ति और समुचित कर्तव्य तथा कृत्य

(1) लाइसेंसधारी एक ऐसा रसायनज्ञ अभिनियोजित करेगा जो रसायन विज्ञान के साथ विज्ञान या बायो केमिस्ट्री या अल्कोहल प्रौद्योगिकी में डिग्री धारित करता हो।

(2) लाइसेंसधारी को एक ऐसे पूर्ण कालिक मुख्य यवासवक को नियुक्त करना होगा जिसके पास 3 वर्ष का औद्योगिक अनुभव एवं किसी भी ख्याति प्राप्त यवासवन शैक्षिक संस्थान का प्रमाण-पत्र हो। विदेशी कार्य अनुभव एवं विदेशी शैक्षिक संस्थायें भी स्वीकार्य होंगी।

(3) रसायनज्ञ लघु यवासवनी में प्रयुक्त कच्चे माल और उत्पादित बीयर की गुणवत्ता की जाँच करने के लिये भी उत्तरदायी होगा।

(4) रसायनज्ञ की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट पर प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रति हस्ताक्षर किया जायेगा।

(5) लघु यवासवनी में इस प्रकार उत्पादित बीयर को बिक्री/उपभोग हेतु उक्त रसायनज्ञ द्वारा यह प्रमाणित किये जाने के पश्चात अवमुक्त किया जायेगा कि यह बीयर मानव उपभोग हेतु उपयुक्त है। लाइसेंसधारी के अतिरिक्त रसायनज्ञ बीयर की विशिष्टताओं, गुणवत्ता तथा सुरक्षा के लिए उत्तरदायी होगा।

(6) प्रत्येक बैच के नमूने का परीक्षण उक्त रसायनज्ञ द्वारा किया जायेगा। बीयर का नमूना मासिक तौर पर लेकर सम्बन्धित क्षेत्रीय प्रयोगशाला के रासायनिक परीक्षक को विश्लेषण हेतु प्रेषित किया जायेगा, जिसे रासायनिक परीक्षक द्वारा पारित किया जायेगा। इस प्रकार प्राप्त रिपोर्ट को लघु यवासवनी के परिसर में ऐसे सहजदृश्य स्थान पर लगाया जायेगा जो उपभोक्ताओं हेतु सुलभ हो।

नियम73लघु यवासवनी में बीयर का संचय

जैसे ही बीयर के एक बैच का उत्पादन किया जायेगा, वैसे ही उसे संचय कक्ष में स्थानान्तरित कर दिया जायेगा और इस प्रकार स्थानान्तरित बीयर की मात्रा का आकलन किण्वन/ब्राइट बीयर टैंक एवं संचयन/सर्विस टैंक के मध्य लगे फ्लो मीटर से किया जायेगा, जिसे अग्रतर टैंक के साथ लगे कैलिब्रेटेड गेज से विधिमान्य किया जायेगा। उक्त फ्लो मीटर आबकारी विभाग के ताले एवं कुंजी के अधीन होगा। इस प्रकार मापित एवं स्थानान्तरित की गयी बीयर की मात्रा प्रपत्र एम0बी0-8क में अभिलिखित की जायेगी। आबकारी शुल्क प्रपत्र एम0बी0-8क में इस प्रकार अभिलिखित मात्रा के आधार पर प्रभारित किया जायेगा। संचयन टैंकों में तैयार उत्पादों को स्थल पर उपभोग हेतु जैसे और जब अपेक्षित हो स्थानान्तरित किया जायेगा।

नियम74-लघु यवासवनी हेतु आबकारी शुल्क एवं अन्य उद्ग्रहण

आबकारी शुल्क ऐसे दरों पर संदत्त किया जायेगा, जैसा कि समय-समय पर सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाय।

नियम75-लघु यवासवनी हेतु लाइसेंस प्राप्त परिसर में ही बिक्री अनुज्ञात होगी

(1) लाइसेंसधारी केवल लाइसेंस में विनिर्दिष्ट परिसर में ड्राट बीयर की बिक्री करेगा।

(2) लाइसेंस अवधि के दौरान लाइसेंस प्राप्त परिसर में कोई परिवर्तन या परिवर्धन आबकारी आयुक्त के पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं किया जायेगा।

(3) लाइसेंसप्राप्त परिसर को लाइसेंस अवधि के दौरान एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवर्तित करने की अनुज्ञा नहीं दी जायेगी। तथापि यदि होटल एवं रेस्टोरेंट के मूल लाइसेंस प्राप्त परिसर में परिवर्तन की अनुज्ञा दी जाती है तो प्रपत्र एमबी-1 में लाइसेंस प्राप्त परिसर में परिवर्तन पर विचार आबकारी आयुक्त द्वारा किया जा सकता है।

नियम76-लघु यवासवनी हेतु लाइसेंस प्राप्त परिसर का लाइसेंस और उसकी योजना को प्रदर्शित किया जाना

लाइसेंस के प्रारूप को लाइसेंसप्राप्त परिसर में सहजदृश्य स्थान पर प्रदर्शित किया जायेगा। लाइसेंसधारी को निरीक्षणकर्ता प्राधिकारियों द्वारा सत्यापन हेतु लाइसेंस प्राप्त परिसर का अनुमोदित मानचित्र/योजना प्रदर्शित करना होगा।

नियम77-लघु यवासवनी में व्यापार के घंटे

(1) लाइसेंसधारी बार लाइसेंस में विनिर्दिष्ट समय में रेस्टोरेंट से भोजन की आपूर्ति के साथ व्यापार कर सकता है।

(2) परन्तु यह और कि आबकारी आयुक्त सरकार के पूर्व अनुमोदन से लाइसेंस अवधि के दौरान व्यापार के घंटों में किसी प्रकार का परिवर्तन कर सकता है और लाइसेंसधारी इस प्रकार परिवर्तित समय का अनुपालन करेगा।

नियम-78-लघु यवासवनी के लाइसेंसों का अन्तरण तथा नामान्तरण

लाइसेंसधारी की मृत्यु होने की दशा में लाइसेंस को उसके विधिक वारिसों/उत्तराधिकारियों के नाम से नामांतरित किया जा सकता है, यदि लाइसेंस नामांतरण हेतु उनके द्वारा किये गये आवेदनों पर विचार करने के पश्चात वे अन्यथा अनुपयुक्त नहीं पाये जाते हैं। विधिक वारिस/उत्तराधिकारी, लाइसेंसधारी की मृत्यु के 30 दिवस के भीतर लाइसेंस की शेष अवधि के लिए लाइसेंस जारी रखने हेतु आबकारी आयुक्त को आवेदन कर सकते हैं। आबकारी आयुक्त अपने विवेक पर मृत लाइसेंसधारी के विधिक वारिसों/उत्तराधिकारियों के नाम से लाइसेंस को जारी रखने की अनुमति प्रदान कर सकता है।

नियम-79-ड्राट बीयर कतिपय व्यक्तियों को न दिया जायेगा या न विक्रित किया जायेगा

21 वर्ष की आयु से नीचे के व्यक्तियों को ड्राट बीयर न तो दी जायेगी या न विक्रित की जायेगी।

नियम-80-लघु यवासवनी में मानक मापों का रखा जाना

लाइसेंसधारी केवल मानक मापों का प्रयोग करेगा, जैसा कि आबकारी आयुक्त द्वारा समय-समय पर विहित किया जाये। मापक उपकरण, बाट एवं माप विभाग द्वारा सम्यक रीति से स्टाम्पित होना चाहिए।

नियम-81-लघु यवासवनी के लाइसेंस प्राप्त परिसर में कतिपय कृत्यों का प्रतिषेध

किसी प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत परिसर/लाइसेंस के होते हुए भी लाइसेंस प्राप्त परिसर में जुआ खेलना, नाच गाना करना अथवा दुश्चरित्र, अस्तव्यस्तता या अश्लीलता सम्बन्धी अन्य कृत्य करना दृढ़तापूर्वक प्रतिबन्धित है।

नियम-82-लघु यवासवनी में सेवकों को नियोजित किया जाना

(1) ड्राट बीयर की बिक्री हेतु किसी महिला की नियुक्ति नहीं की जायेगी। इस प्रयोजनार्थ सम्बन्धित जिले के जिला आबकारी अधिकारी का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात पुरुष नियुक्त किये जायेंगे। इस प्रयोजनार्थ सम्बन्धित जिला आबकारी अधिकारी द्वारा परिचय पत्र जारी किया जायेगा।

(2) प्राधिकृत अभिकर्ता या सेवक का प्रत्येक कृत्य लाइसेंसधारी का कृत्य समझा जायेगा। लाइसेंसधारी उन्मादी कार्य के लिये उत्तरदायी होगा।

नियम-83-लघु यवासवनी में अनुज्ञापी द्वारा लेखा-जोखा का रखा जाना

प्रत्येक लाइसेंसधारी दैनिक उत्पादन एवं विक्रय का पूरा एवं सही लेखा-जोखा एम.बी.-9 प्रपत्र में अनुरक्षित करेगा जो क्रमांक में संख्यांकित किये जायेंगे एवं प्रत्येक पृष्ठ पर सम्बन्धित जिले के जिला आबकारी अधिकारी की मुहर लगी होगी। वह आबकारी आयुक्त द्वारा यथापेक्षित अन्य विवरण रखेगा और प्रत्येक माह के 5वें दिनांक के पूर्व विवरण आबकारी आयुक्त द्वारा यथाविहित प्रपत्र में जिला आबकारी अधिकारी एवं आबकारी निरीक्षक को प्रेषित करेगा। समस्त पंजिकायें जिला आबकारी अधिकारी द्वारा सम्यक रूप से अनुमोदित होनी चाहिए।

नियम-84-लघु यवासवनी के दैनिक लेखा पंजी में प्रविष्टियाँ

लाइसेंसधारी लाइसेंस प्राधिकारी अथवा आबकारी विभाग के किसी अन्य अधिकारी, जो आबकारी निरीक्षक से निम्न श्रेणी का न हो, द्वारा मांग किये जाने पर कोई भी लेखा विवरण सांख्यिकी या कोई अन्य विशिष्टियाँ उसे ऑनलाइन अथवा हस्त चालान के माध्यम से उपलब्ध करायेगा।

नियम-85-लघु यवासवनी के परिसर का निरीक्षण करने हेतु प्राधिकृत अधिकारी

आबकारी निरीक्षक की श्रेणी से अनिम्न कोई अधिकारी लाइसेंस प्राप्त परिसर में कार्यशील घंटों में प्रवेश कर सकता है एवं उसकी जाँच कर सकता है तथा समस्त लेखाओं, पंजिकाओं एवं स्टाकों का निरीक्षण तथा सत्यापन कर सकता है। निरीक्षणकर्ता अधिकारी ऐसे नमूनों, जैसा कि आवश्यक हो, को लेने के लिए अथवा ऐसे अभिलेखों एवं पंजिकाओं, जो आवश्यक हों, का प्रभार ग्रहण करने हेतु सक्षम होगा और लाइसेंसधारी के लिए यह आवश्यक होगा कि वह ऐसे निरीक्षणकर्ता अधिकारियों को निरीक्षण करने, सत्यापन करने एवं नमूना लेने हेतु युक्तियुक्त सहायता प्रदान करे। परिसर से कोई अभिलेख हटाये जाने पर आबकारी अधिकारी को उसकी रसीद देनी पड़ेगी और इस सम्बन्ध में निरीक्षण पुस्तिका में प्रविष्टि करनी होगी।

नियम-86-लघु यवासवनी में निरीक्षण पुस्तिका का अनुरक्षित किया जाना

निरीक्षणकर्ता अधिकारियों के प्रयोग हेतु एक निरीक्षण पुस्तिका, प्रपत्र एम.बी.-10 में रखी जायेगी और इसकी सुरक्षित अभिरक्षा के लिए लाइसेंसधारी उत्तरदायी होगा। निरीक्षण पुस्तिका राजकीय सम्पत्ति होगी और लाइसेंस अवधि समाप्त होने पर इसे सम्बन्धित आबकारी अधिकारी को सौंप दी जायेगी।

नियम-87-लघु यवासवनी लाइसेंस समाप्त होने पर लाइसेंस प्राधिकारी को अभ्यर्पित किया जाना

इस नियमावली के अधीन स्वीकृत प्रत्येक लाइसेंस समाप्त होने पर लाइसेंसधारी द्वारा लाइसेंस प्राधिकारी को अभ्यर्पित किया गया समझा जायेगा।

नियम-88-लघु यवासवनी के कठिनाइयों का निवारण

यदि आवेदन अथवा इस नियमावली के किसी निर्वचन के सम्बन्ध में कोई सन्देह या विवाद उत्पन्न होता है तो उसपर आबकारी आयुक्त का निर्णय अन्तिम होगा।